प्रतिनिधि, मुंगेर एक पुरानी कहावत है ‘ मालिक गैले घर, जेन्हे-तेन्हे हॉर ‘. यह कहावत मुंगेर नगर निगम के लिए पूरी तरह सटीक बैठता है. यहां जब नगर आयुक्त कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते तो कर्मचारियों की चांदी रहती है. हाजिरी बना कर कर्मचारी गायब हो जाते हैं. लोग अपने विभिन्न कार्यों को लेकर उन कर्मियों के इंतजार में भर दिन निगम कार्यालय का चक्कर लगाते रहते. किंतु नगर निगम के बाबू नजर नहीं आते. गुरुवार को नगर निगम का नजारा कुछ इसी प्रकार था. नगर आयुक्त प्रभात कुमार सिन्हा एवं मेयर कुमकुम देवी कार्यालय में उपस्थित नहीं थे. फलत: आधे दर्जन कर्मचारी हाजिरी बना कर लापता थे. एक कर्मचारी नाम नहीं छापने के शर्त पर बताया कि साहब जब भी छुट्टी पर रहते हैं या नहीं आते हैं तो कर्मचारियों की मनमानी हो जाती है. कोई काम नहीं करता और बैठ कर समय खपा लेता है. इससे जरूरी काम से पहुंचने वाले लोगों का काम नहीं हो पाता. वहीं एक वृद्ध सहदेव कुमार टैक्स दारोगा से मिलने के लिए निगम कार्यालय पहुंचा था. उस समय घड़ी में 12:30 बजे रहे थे. वह निगम कार्यालय में ही बैठ कर टैक्स दारोगा का इंतजार करने लगे. लेकिन तीन बजे तक टैक्स दारोगा कार्यालय नहीं आये. वहीं कई कर्मचारी तीन बजते ही अपने घर की ओर भी प्रस्थान कर गये.
नगर निगम : साहब के नहीं रहने पर कर्मचारियों की चलती है मनमानी
प्रतिनिधि, मुंगेर एक पुरानी कहावत है ‘ मालिक गैले घर, जेन्हे-तेन्हे हॉर ‘. यह कहावत मुंगेर नगर निगम के लिए पूरी तरह सटीक बैठता है. यहां जब नगर आयुक्त कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते तो कर्मचारियों की चांदी रहती है. हाजिरी बना कर कर्मचारी गायब हो जाते हैं. लोग अपने विभिन्न कार्यों को लेकर उन […]
