मुंगेर: मुंगेर रेलवे स्टेशन पर लगातार लिंक फेल रहने से यात्रियों को रेलवे आरक्षण टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. शनिवार को यहां एक भी आरक्षण टिकट की बुकिंग नहीं हो पायी. फलत: यात्री जहां परेशान रहे वहीं इस बदहाल व्यवस्था से रेलवे के राजस्व को भी क्षति हो रही है.
शनिवार को मुंगेर रेलवे स्टेशन के आरक्षण काउंटर पर यात्रियों की भीड़ लगी थी. क्योंकि सुबह 10 बजे से तत्काल टिकट बुकिंग किया जाता है. कुछ लोग लाइन में खड़े थे. बुकिंग कर्मचारी विजय कुमार सुबह 8 बजे पहुंचे और काउंटर खोल दिया, लेकिन लिंक फेल था. आरक्षण टिकट के लिए लाइन में लगे लोग अपनी परची उन्हें बढ़ाने लगे, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए परची नहीं लिया कि लिंक आने के बाद ही काम हो पायेगा. जैसे ही सुबह 10 बजा कि लोग एक फिर कर्मचारी से पूछने लगा कि आज भी तत्काल टिकट नहीं कटेगा क्या? कर्मी ने फिर कहा कि हम क्या कर सकते हैं. लिंक आने के बाद ही न टिकट कट सकता है. 10:10 के बाद धीरे-धीरे लोग बुकिंग काउंटर से हटने लगे. हाल यह रहा कि दोपहर 2 बजे तक लिंक नहीं आया और एक भी आरक्षण नहीं हो पाया.
मुंगेर में है मात्र एक आरक्षण काउंटर : प्रमंडलीय मुख्यालय मुंगेर में रेलवे द्वारा नवनिर्मित मुंगेर रेलवे स्टेशन में मात्र एक टिकट आरक्षण काउंटर की व्यवस्था की गयी है. जबकि मुख्यालय होने के कारण यहां बड़ी संख्या में लोग आरक्षण टिकट के लिए प्रतिदिन मुंगेर स्टेशन पहुंचते हैं.
क्यों हो रही है समस्या : बताया जाता है कि मुंगेर रेलवे स्टेशन आज भी पुराने जमाने के मॉडम से जुड़ा है. पूर्व रेलवे के चार ही स्टेशन ऐसे हैं जहां आज भी पुराने जमाने के मॉडम से ही काम चल रहा है. जिसमें मुंगेर रेलवे स्टेशन के अलावे दुमका, गोड्डा एवं बांका शामिल है जो स्थानीय बीएसएनएल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. जिसके कारण यह मॉडम काफी धीमी गति से काम करता है. जिस पर बीएसएनएल विभाग भी ज्यादा ध्यान नहीं देती है. फलत: हमेशा लिंक की समस्या बनी रहती है.
कोलकाता से जुड़े नेटवर्क तो कम होगी परेशानी : मुंगेर रेलवे स्टेशन पर 6420 का नया मॉडम लगाया गया है जो हाई स्पीड से काम करता है. लेकिन अबतक बीएसएनएल द्वारा कोलकाता से उसे नहीं जोड़ा जा सका है. अगर इसे जोड़ दिया जाय तो 90 प्रतिशत लिंक की समस्या खत्म हो जायेगी और लोगों को यहां बिना टिकट के नहीं लौटना होगा.
कहते हैं बुकिंग क्लर्क
बुकिंग क्लर्क विजय कुमार ने बताया कि लिंक की समस्या यहां रहती है. दूर संचार विभाग को सूचना दी जाती है. लिंक फेल होने की सूचना विभाग के वरीय अधिकारियों को भी दे दी जाती है. उन्होंने स्वीकार किया कि लिंक फेल रहने से यहां के राजस्व में भी कमी आयी है.
