विवादों में घिरा विश्वनाथ सिंह विधि संस्थान

मुंगेर : वर्ष 1983 में मुंगेर में स्थापित विश्वनाथ सिंह विधि संस्थान जितेंद्र सिंह तोमर के मामले के लेकर पूरी तरह विवादों में घिर गया है.पिछले 32 वर्षो के दौरान इस संस्थान से हजारों छात्र-छात्रएं लॉ की डिग्रियां प्राप्त की और देश के विभिन्न भागों में कहीं वकालत कर रहे हैं तो कहीं न्यायिक सेवा […]

मुंगेर : वर्ष 1983 में मुंगेर में स्थापित विश्वनाथ सिंह विधि संस्थान जितेंद्र सिंह तोमर के मामले के लेकर पूरी तरह विवादों में घिर गया है.पिछले 32 वर्षो के दौरान इस संस्थान से हजारों छात्र-छात्रएं लॉ की डिग्रियां प्राप्त की और देश के विभिन्न भागों में कहीं वकालत कर रहे हैं तो कहीं न्यायिक सेवा में उच्च पदों पर बैठे हैं. लेकिन दिल्ली में आप सरकार के कानून मंत्री रहे जितेंद्र सिंह तोमर के मामले को लेकर यह संस्थान विवादों में घिर गया.
तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबंध इस कॉलेज में फर्जी रूप से नामांकन के मामले पूर्व में भी आते रहे हैं. वर्ष 2001 में ही तत्कालीन प्राचार्य सुरेंद्र प्रसाद ने कॉलेज के प्रधान लिपिक पर फर्जी तरीके से नामांकन का मामला उठाया था और 2006 में तो उन्होंने एक नामांकन के मामले में लिपिक के विरुद्ध कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी.
जितेंद्र सिंह तोमर के मामले में भी जिस प्रकार महाविद्यालय से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब हैं उससे फर्जीवाड़े की संभावना प्रबल लगती है. यहां तक कि तोमर के नामांकन फार्म तक कॉलेज में उपलब्ध नहीं है. बताया जा रहा है कि जब तोमर के मामले में यह बात उछला कि उन्होंने मुंगेर के विधि संस्थान से ही लॉ की डिग्री प्राप्त की है तो कॉलेज प्रबंधन ने आनन-फानन में उन सभी दस्तावेजों को हटा दिया या नष्ट कर दिया. जिसमें गड़बड़ी की गयी थी.
यही कारण है कि नामांकन फार्म से लेकर कॉलेज का उपस्थिति पंजी तक गायब है. बहरहाल दिल्ली पुलिस शुक्रवार को मामले की तफ्तीस कर लौट गयी है और यह स्पष्ट करना अभी बांकी है कि विधि से संबंधित तोमर के प्रमाण पत्र सही है या गलत.

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