सकारात्मकता व सद्गुणों से जोड़ना ही योग और यज्ञ का मुख्य प्रयोजन

मुंगेर : संन्यास पीठ के पादुका दर्शन परिसर में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती एवं रिखियापीठ की पीठाधीश्वरी स्वामी सत्यसंगानंद सरस्वती की उपस्थित में संपन्न हुआ. जिसमें गुरु पूजन के बाद बाल योग मित्र मंडल के बच्चों ने भक्तिमय स्त्रोत्र पाठ तथा कीर्तन प्रस्तुत किया गया. […]

मुंगेर : संन्यास पीठ के पादुका दर्शन परिसर में चल रहे श्री लक्ष्मीनारायण यज्ञ के चौथे दिन बुधवार को परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती एवं रिखियापीठ की पीठाधीश्वरी स्वामी सत्यसंगानंद सरस्वती की उपस्थित में संपन्न हुआ. जिसमें गुरु पूजन के बाद बाल योग मित्र मंडल के बच्चों ने भक्तिमय स्त्रोत्र पाठ तथा कीर्तन प्रस्तुत किया गया. जिसमें एक विशेष प्रसन्नता गीत प्रस्तुत किया गया.

परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने उक्त गीत का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रसन्नता गीत हमें यौगिक जीवन के मौलिक सद्गुणों, प्रसन्नता से जुड़ने के लिये प्रेरित करता है और स्वयं को जीवन की सकारात्मकता एवं सद्गुणों से जोड़ना ही योग और यज्ञ का मुख्य आयोजन है.
उन्होंने बताया कि दान केवल देना नहीं है, इसके लिए कुछ आवश्यकताएं हैं. जिसकी पहली आवश्यकता है एक ऐसी मानसिकता की जो परमार्थ से जुड़ी है न कि स्वार्थ से. दान तभी फलीभूत होगा जब हम स्वयं को सद्गुणों से जोड़ेंगे. ये सद्गुण मात्र बुद्धि स्तर पर न हो. बल्कि हमारे अनुभव और अभिव्यक्ति में परिलक्षित होना चाहिए.
साथ ही दान में हमें दूसरों से जुड़कर उनकी जरूरतों को समझना चाहिए तथा आत्मभाव विकसित करना चाहिए. आज के डिजिटल युग में जब आपस में दूरियां बहुत बढ़ गयी है. दान का यह पक्ष और भी अहमियत रखता है. साथ ही दान श्रद्धायुक्त और अपने सामर्थ्यनुसार होना चाहिए. इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए दान किया जाये जो मनुष्य स्वयं में एक गहन साधना और आध्यात्मिक पुरुषार्थ बन जाता है.

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