Motihari: मुख्य नाका के सीमा चौकी पर बढ़ाई गई निगरानी, विशेष परिस्थिति में आने-जाने की इजाजत

भारत को नेपाल से जोड़ने वाली मैत्री पुल पर बुधवार को पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा. जिस पुल पर वाहनों की बात कौन करें पैदल निकलने के लिए भी मशक्कत करनी होती थी, वहां पूरी शांति थी.

रक्सौल . भारत को नेपाल से जोड़ने वाली मैत्री पुल पर बुधवार को पूरे दिन सन्नाटा छाया रहा. जिस पुल पर वाहनों की बात कौन करें पैदल निकलने के लिए भी मशक्कत करनी होती थी, वहां पूरी शांति थी. नेपाल में युवाओं के समूह के द्वारा मंगलवार को किए गए राष्ट्रव्यापी उग्र आंदोलन के बाद बुधवार को पूरे नेपाल में सेना के द्वारा निषेधाज्ञा लगा दी गयी. रक्सौल बॉर्डर पर दोनों तरफ (भारत-नेपाल) सशस्त्र सीमा बल व सशस्त्र पुलिस बल नेपाल के जवानों की तैनाती देखी गयी. आमतौर पर जवानों की तैनाती से अधिक तैनाती बुधवार को देखी गयी. रक्सौल के मैत्री पुल पर नेपाल के तरफ से आने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही थी. यहां नेपाली नागरिकों को भारत में प्रवेश करने से रोका जा रहा था तो भारतीय नागरिक भी जो नेपाल में बिना किसी ठोस कारण के जाना चाह रहे थे, उनको बॉर्डर पर रोका जा रहा था. मेडिकल कारण से आने-जाने वाले लोगों को उचित कागजात देखने के बाद जाने की अनुमति दी जा रही थी. मुख्य नाका पर एसएसबी के अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गयी थी. निषेधाज्ञा के कारण भारत से नेपाल के तरफ जाने वाले लोगों को भी नेपाल की सशस्त्र पुलिस बल के द्वारा पुल से ही वापस कर दिया जा रहा था. हालांकि कुछ ग्रामीण नाके से लोग पैदल नेपाल के तरफ जाते हुए दिखाई दिए. रक्सौल से सटे पंटोका, अलऊ आदि इलाके से लोग पैदल सीमा को पार करते हुए देखे गए. पूर्वी चंपारण के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने भी मंगलवार की रात रक्सौल बॉर्डर पर पहुंच कर स्थिति की समीक्षा की थी और स्थानीय पुलिस पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया. भारत और नेपाल के बीच आपसी संबंध इतने प्रगाढ़ है कि दोनों देश के बीच लोगों से लोगों का संबंध है. ऐसे में बॉर्डर पर हुई सख्ती के बाद मायके से ससुराल और ससुराल से मायके जाने वाली बेटी-बहनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. बुधवार को प्रभात खबर की टीम लगभग एक घंटे तक मैत्री पुल पर रही, इस दौरान एक दर्जन से अधिक ऐसे लोग आए जो किसी ना किसी कारण से भारत गए थे. नेपाल के इनरवा निवासी मो. साहेब की पत्नी का ऑपरेशन मोतिहारी में हुआ था. अस्पताल से छूट्टी मिलने के बाद वे लोग अपने घर जा रहे थे, लेकिन बॉर्डर सख्ती के कारण काफी पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया.

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Published by: Ranjeet thakur

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