Motihari News: सदर अंचल कार्यालय में गुरुवार को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) प्रमाण पत्र बनवाने पहुंची एक छात्रा की परेशानी सामने आई. नामांकन के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र नहीं बनने पर अमर छतौनी निवासी मनिका कुमारी कार्यालय परिसर में ही रो पड़ी. छात्रा का कहना था कि नामांकन के लिए ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र जरूरी है, लेकिन काफी अनुरोध के बाद भी उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया.
EWS प्रमाण पत्र को लेकर छात्रों की बढ़ी परेशानी
अभ्यर्थियों का कहना है कि सदर अंचल कार्यालय में प्रतिदिन 10 से 15 लोग ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचते हैं, लेकिन कई लोगों को बिना प्रमाण पत्र के लौटना पड़ता है. उनका आरोप है कि शहरी क्षेत्र में कम जमीन या पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी होने के कारण भी आवेदन अस्वीकार किए जा रहे हैं.
राजस्व अधिकारी ने बताई जांच की प्रक्रिया
राजस्व अधिकारी नवनीत प्रकाश ने बताया कि शहरी क्षेत्र के आवेदनों की विशेष रूप से जांच की जाती है. उन्होंने कहा कि न्यायालय की ओर से इस प्रकार के मामलों में सख्त निर्देश दिए गए हैं, इसलिए प्रत्येक आवेदन का नियमानुसार सत्यापन किया जाता है.
क्या हैं ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र के नियम
अधिकारियों के अनुसार बिहार में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र केंद्र सरकार के निर्धारित मानकों के आधार पर जारी किया जाता है. इसके लिए परिवार की वार्षिक आय आठ लाख रुपये से कम होनी चाहिए. साथ ही परिवार के पास पांच एकड़ या उससे अधिक कृषि भूमि, एक हजार वर्ग फीट या उससे बड़ा आवासीय फ्लैट तथा अधिसूचित शहरी क्षेत्र में 100 वर्ग गज या उससे अधिक का आवासीय भूखंड नहीं होना चाहिए.
कम जमीन होना आवेदन खारिज करने का आधार नहीं
राजस्व अधिकारी ने स्पष्ट किया कि केवल पांच या दस धुर जमीन होना अपने आप में ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र अस्वीकार करने का आधार नहीं है. प्रत्येक आवेदन का उपलब्ध अभिलेखों और निर्धारित नियमों के अनुसार परीक्षण किया जाता है. पात्रता पूरी होने पर ही प्रमाण पत्र जारी किया जाता है.
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