मधुबन में राम-जानकी मंदिर की जमीन पर बड़ा फैसला, 16 जमाबंदियां रद्द, मंदिर के नाम पुरानी जमाबंदी बहाल

मधुबन में राम-जानकी मंदिर की 17 बीघा जमीन से जुड़े 12 साल पुराने मामले में प्रशासन ने बड़ा फैसला सुनाया है. 16 अवैध जमाबंदियों को रद्द कर मंदिर की पुरानी जमाबंदी बहाल करने का आदेश दिया गया है.

Madhuban News: राम-जानकी मंदिर की 17 बीघा 10 कठ्ठा जमीन से जुड़े करीब 12 साल पुराने जमाबंदी रद्दीकरण मामले में मोतिहारी के एडीएम (राजस्व) मुकेश कुमार सिन्हा ने बड़ा फैसला सुनाया है. आदेश में 16 जमाबंदियों को अवैध मानते हुए रद्द कर दिया गया है और मंदिर व धर्मशाला के नाम दर्ज पुरानी जमाबंदियों को बहाल करने का निर्देश दिया गया है.

एडीएम ने इस संबंध में मधुबन के अंचल अधिकारी (सीओ) को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है.

क्या है पूरा मामला?

आदेश के अनुसार, नागरमल शर्मा द्वारा वर्ष 1949 में 17 बीघा 10 कठ्ठा जमीन श्रीराम-जानकी मंदिर के नाम दान की गई थी.

बाद में आरोप है कि दानकर्ता के पुत्र की ओर से गलत तरीके से जमाबंदी तैयार कराई गई और उसी आधार पर यह जमीन 16 लोगों के नाम बेच दी गई, जिसे एडीएम ने अपने आदेश में अवैध माना है.

पुरानी जमाबंदी बहाल करने का निर्देश

एडीएम राजस्व ने मधुबन अंचल और डीसीएलआर के पूर्व आदेश को बरकरार रखते हुए 16 जमाबंदियों को रद्द करने का निर्णय दिया.

साथ ही मंदिर और धर्मशाला के नाम दर्ज जमाबंदी संख्या 92 (130), 244 (15) और 81 (105) को पुनः बहाल करने का निर्देश जारी किया गया है.

शिकायत के बाद हुई थी जांच

मामले की शिकायत राम-जानकी मंदिर के सचिव राजेश कुमार सलेमपुरिया ने की थी.

इसके बाद अंचल प्रशासन ने जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपी. आदेश के अनुसार, जांच रिपोर्ट, राजस्व अभिलेखों और दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर मामले की सुनवाई की गई.

आदेश में कई खेसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए संबंधित भूमि को सार्वजनिक उपयोग की भूमि बताया गया है.

2014 में भेजा गया था प्रस्ताव

आदेश पत्र के अनुसार, वर्ष 2014 में ही अंचल कार्यालय और डीसीएलआर की ओर से जमाबंदी रद्द करने का प्रस्ताव भेजा गया था.

मामले में यह भी उल्लेख है कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने अपने 8 दिसंबर 2003 के आदेश के तहत तत्कालीन न्यासधारी राधेश्याम शर्मा को पद से हटा दिया था. इस आदेश को चुनौती देने के लिए राधेश्याम शर्मा हाईकोर्ट गए थे, जहां उन्हें राहत नहीं मिली.

सीओ ने क्या कहा?

मधुबन के अंचल अधिकारी सतीश गुप्ता ने कहा कि एडीएम के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है. आदेश के अनुरूप आवश्यक एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी.


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लेखक के बारे में

By Shashi chandra tiwary

शशि चंद्र तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं. साल 2009 में सन्मार्ग हिंदी दैनिक से पत्रकारिता की शुरुआत की और 2011 से लगातार प्रभात खबर के साथ जुड़े हुए हैं. वर्तमान में वह पूर्वी चंपारण जिले के मधुबन से प्रभात खबर के संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. समसामयिक, अपराध, राजनीति, प्रशासनिक गतिविधि और कृषि जैसे विषयों की पत्रकारिता में विशेष रुचि है.

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