तिरहुत एग्रीकल्चर कॉलेज की 30 छात्राएं अब गांवों में करेंगी रिसर्च, किसानों के बीच सीखेंगी खेती

तिरहुत कृषि महाविद्यालय की 30 छात्राएं रावे कार्यक्रम के तहत दो महीने तक गांवों में कृषि, किसानों की गतिविधियों और ग्रामीण स्वरोजगार के विभिन्न मॉडलों का सर्वे और शोध करेंगी.

तिरहुत एग्रीकल्चर कॉलेज: तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली की स्नातक कृषि की 30 छात्राएं अब गांवों में जाकर किसानों के बीच कृषि कार्यों और ग्रामीण जीवन का अनुभव लेंगी. कृषि विज्ञान केंद्र के रावे कार्यक्रम के तहत 27 अगस्त से शुरू हुए इस कार्यक्रम में छात्राएं एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी के सात प्रमुख विषयों पर सर्वे और शोध करेंगी. यह कार्यक्रम दो महीने तक चलेगा.

इस दौरान छात्राएं जिले के विभिन्न चयनित गांवों का दौरा करेंगी. वहां कृषि, खेत-खलिहान और ग्रामीण जीवन से जुड़ी गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा. इसका उद्देश्य छात्राओं को किताबों में पढ़े कृषि ज्ञान के साथ जमीनी अनुभव से भी जोड़ना है.

कृषि के सात विषयों पर होगा शोध

कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख डॉ. अरबिंद कुमार सिंह ने बताया कि छात्राएं ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव यानी रावे कार्यक्रम के तहत शोध और सर्वे कर रही हैं. कार्यक्रम में सस्य विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, कृषि भौतिक विज्ञान, कृषि रसायन, कृषि अर्थशास्त्र, पशुपालन और कृषि अभियंत्रण सहित सात प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है.

उन्होंने बताया कि चार वर्षीय कृषि विज्ञान पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को कृषि के विभिन्न विषयों का वैज्ञानिक और क्रमबद्ध तरीके से अध्ययन कराया जाता है. सेमेस्टर प्रणाली के तहत छात्र-छात्राओं को कृषि तकनीक से संबंधित विषयों का सैद्धांतिक और प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है.

रावे कार्यक्रम से पहले दिया गया ओरिएंटेशन

कार्यक्रम के पहले दिन छात्राओं के लिए रावे ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया. डॉ. गायत्री कुमारी पाढ़ी ने छात्राओं का मार्गदर्शन करते हुए रावे कार्यक्रम के उद्देश्य, विभिन्न गतिविधियों और कार्ययोजना की जानकारी दी. इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के अन्य वरिष्ठ वैज्ञानिक भी मौजूद रहे.

ग्रामीण स्वरोजगार गतिविधियों का भी होगा अध्ययन

प्रशिक्षण के दौरान छात्राओं ने ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित कृषि और स्वरोजगार से जुड़ी कई गतिविधियों का सर्वे किया. इसमें किसानों द्वारा गेंदा के फूल की माला बनाकर बिक्री करना, आटा चक्की और प्लाईवुड जैसे लघु उद्योग, जीविका से जुड़ी महिलाओं की गतिविधियां, अगरबत्ती उद्योग, आटा प्रसंस्करण और चूड़ा बनाने की मशीन जैसी गतिविधियां शामिल हैं.

दो महीने तक चलने वाले इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्राएं गांवों की कृषि व्यवस्था, किसानों की चुनौतियों और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों को करीब से समझेंगी. इससे उन्हें भविष्य में कृषि क्षेत्र में बेहतर शोध और काम करने का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.

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By हिमांशु कुमार

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