मोतिहारी: करोड़ों खर्च फिर भी नहीं बचा बांध, पसाह नदी का पानी भरने से हजारों एकड़ धान डूबा

करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी पसाह नदी के बांध टूटने से छौड़ादानो प्रखंड में बाढ़ और जलजमाव की स्थिति गंभीर बनी हुई है. हजारों एकड़ धान की फसलें पानी में डूब गई हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. बांध निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है.

Motihari News: वर्ष 2025 में करोड़ों रुपये खर्च कर पसाह नदी की उड़ाही और बांध निर्माण कराए जाने के बावजूद छौड़ादानो प्रखंड के कई क्षेत्रों में बाढ़ और जलजमाव की समस्या बनी हुई है. पुरैनिया, भतनहिया, रामपुर, हिरमणि तथा आदापुर प्रखंड के बेलहिया पंचायत समेत आसपास के इलाकों में बांध टूटने से हजारों एकड़ धान की फसल बाढ़ के पानी में डूब गई है. बांध की स्थिति और निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं.

Chhauradano News: जगह-जगह से टूट गया पसाह नदी का बांध

पसाह नदी का बांध कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त होकर टूट गया है. इसके कारण नदी का पानी आसपास के खेतों में फैल गया है. बाढ़ के पानी से धान की फसल जलमग्न हो गई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान की आशंका है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में हर वर्ष पसाह नदी का पानी आसपास के इलाकों में फैल जाता है. बांध की मजबूती नहीं होने के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है.

2025 में करोड़ों खर्च के बाद भी नहीं बदली स्थिति

वर्ष 2025 में पसाह नदी की उड़ाही और बांध निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे. इसके बावजूद वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं.

भतनहिया पंचायत के पूर्व मुखिया मुकेश कुमार यादव ने आरोप लगाया कि नदी की उड़ाही और बांध निर्माण के नाम पर खर्च की गई राशि के अनुरूप धरातल पर काम दिखाई नहीं दे रहा है. उन्होंने कथित अनियमितता की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.

सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका का आरोप

मुकेश कुमार यादव का आरोप है कि बांध निर्माण के नाम पर महज खानापूर्ति की गई. उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया होता तो बांध इतनी जल्दी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त नहीं होता.

उन्होंने सरकार और संबंधित विभाग से मामले की तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की है.

धान के साथ रबी की खेती पर भी पड़ता है असर

पसाह नदी में बाढ़ और जलजमाव का असर केवल खरीफ की धान की फसल तक सीमित नहीं रहता. किसानों के अनुसार खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से रबी की खेती भी प्रभावित होती है.

पुरैनिया, भतनहिया, रामपुर, हिरमणि और आदापुर प्रखंड के बेलहिया पंचायत समेत आसपास के क्षेत्रों में हर वर्ष बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलजमाव की चपेट में आती है. इससे किसानों को फसल नुकसान के साथ आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है.

मापी पुस्तिका से भुगतान तक जांच की मांग

बाढ़ प्रभावित किसानों और ग्रामीणों ने वर्ष 2025 में पसाह नदी की उड़ाही एवं बांध निर्माण पर खर्च की गई राशि का भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच कराने की मांग की है.

उन्होंने कहा कि मापी पुस्तिका, स्वीकृत राशि, भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता और धरातल पर हुए कार्य का मिलान कराया जाना चाहिए. यदि जांच में वित्तीय या तकनीकी अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जानी चाहिए.

मजबूत बांध से किसानों को मिल सकती है राहत

ग्रामीणों का कहना है कि पसाह नदी की वैज्ञानिक तरीके से उड़ाही और बांध का गुणवत्तापूर्ण एवं स्थायी निर्माण कराया जाए तो बाढ़ और जलजमाव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

फिलहाल बांध टूटने से कई पंचायतों के हजारों एकड़ खेत जलमग्न हैं और धान के पौधे पानी में डूबे हुए हैं. हालांकि निर्माण में अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

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लेखक के बारे में

By मनोज कुमार गुप्ता

मनोज कुमार गुप्ता बीते 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वह प्रिंट, रेडियो और डिजिटल माध्यमों का व्यापक अनुभव रखते हैं. वर्तमान में भारत-नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र से रिपोर्टिंग करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, सीमा सुरक्षा और नेपाल की खबरों पर पैनी नजर रखते हैं. सामाजिक सरोकारों में गहरी रुचि के साथ वे क्षेत्र की जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाने और उनके समाधान के प्रयासों के लिए जाने जाते हैं.

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