Chakia Arms Factory: गड़हिया बाजार थाना क्षेत्र में कारतूस बरामद होने के बाद शुरू हुई पुलिस जांच ने अवैध हथियारों के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा कर दिया. जांच के दौरान पुलिस चकिया के ओझा टोला में फोरलेन के किनारे संचालित एक अवैध हथियार निर्माण फैक्ट्री तक पहुंच गई. फैक्ट्री देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए.
इस मामले में पुलिस ने कथित मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह को गिरफ्तार कर लिया है.
कारतूस की बरामदगी से खुली परत-दर-परत कहानी
पुलिस के अनुसार, सबसे पहले गड़हिया बाजार थाना क्षेत्र के सवंगिया गांव में बड़ी मात्रा में कारतूस मिलने की सूचना पर कार्रवाई की गई. इस दौरान रामबाबू पासवान को गिरफ्तार किया गया.
इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा तो मधुबन थाना क्षेत्र में दो स्थानों से कारतूस बरामद हुए और वली आलम उर्फ मुन्ना को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ के आधार पर पुलिस फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा मोहन निवासी श्रीकांत सिंह तक पहुंची.
चकिया में मिली अवैध हथियार फैक्ट्री
श्रीकांत सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चकिया के ओझा टोला स्थित फोरलेन के समीप छापेमारी की, जहां अवैध हथियार बनाने की फैक्ट्री का खुलासा हुआ.
पुलिस अब फैक्ट्री से मिले साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि यहां बने हथियार किन-किन लोगों और किन जिलों तक पहुंचाए गए.
उत्तर बिहार तक फैले नेटवर्क की जांच
प्रारंभिक जांच में अवैध हथियारों की सप्लाई का नेटवर्क उत्तर बिहार के कई जिलों तक फैला होने के संकेत मिले हैं.
पुलिस अब हथियार खरीदने वालों, सप्लाई चेन और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है. मामले में चार लोगों से पूछताछ की जा रही है.
पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका है आरोपी
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार श्रीकांत सिंह के खिलाफ पहले से आर्म्स एक्ट के पांच मामले दर्ज हैं. वर्ष 2012 में वह यूएपीए से जुड़े एक मामले में भी जेल जा चुका है.
उसके आपराधिक रिकॉर्ड को देखते हुए पुलिस उसके पुराने संपर्कों और नेटवर्क की भी जांच कर रही है.
जांच जारी, कई और खुलासों की संभावना
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि अवैध हथियार निर्माण की यह फैक्ट्री कब से संचालित हो रही थी और अब तक कितने लोगों को हथियारों की आपूर्ति की गई.
अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर खरीदारों और सहयोगियों की सूची तैयार की जा रही है. पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े कई और लोगों का खुलासा हो सकता है और उत्तर बिहार में सक्रिय अवैध हथियार गिरोहों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की जा सकती है.
