East Champaran Flood: मानसून के दौरान संभावित बाढ़ को देखते हुए पूर्वी चंपारण जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है. नेपाल से आने वाले पानी के दबाव और जिले से होकर गुजरने वाली गंडक, सिकरहना (बूढ़ी गंडक), बागमती और लालबकेया नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है. संवेदनशील प्रखंडों में निगरानी बढ़ा दी गई है.
जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह तैयार है और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड में रखा गया है.
इन प्रखंडों पर प्रशासन की विशेष नजर
जिला प्रशासन ने सुगौली, बंजरिया, संग्रामपुर, ढाका और कुंडवा चैनपुर समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.
इन इलाकों में तटबंधों और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है.
तटबंधों पर होगी 24 घंटे निगरानी
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कमजोर और संवेदनशील तटबंधों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया गया है.
- सप्ताह में कम से कम दो बार रात्रिकालीन निरीक्षण
- 24 घंटे निगरानी व्यवस्था
- वायरलेस सेट और मोबाइल ट्रैकिंग सिस्टम से मॉनिटरिंग
- जलस्तर और कटाव पर लगातार नजर
राहत और बचाव की पूरी तैयारी
संभावित बाढ़ की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने पहले से तैयारी कर ली है.
- 285 ऊंचे स्थानों को राहत शिविर के लिए चिन्हित किया गया है.
- 165 निजी नाव मालिकों के साथ समझौता किया गया है.
- 7 मोटरबोट और एक एसडीआरएफ टीम को तैनात रखा गया है.
- आवश्यकता पड़ने पर सामुदायिक रसोई शुरू करने की योजना तैयार है.
राहत सामग्री का किया गया भंडारण
आपदा की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने आवश्यक राहत सामग्री का अग्रिम भंडारण किया है.
मुख्य तैयारियां इस प्रकार हैं—
| तैयारी | स्थिति |
| पॉलीथीन शीट उपलब्ध | 20,281 |
| अतिरिक्त मांग | 5,000 |
| राहत शिविर | 285 |
| निजी नावों का निबंधन | 165 |
| मोटरबोट | 7 |
| एसडीआरएफ टीम | 1 |
| तटबंध निरीक्षण | पूरा |
कंट्रोल रूम 24 घंटे रहेगा सक्रिय
जिला आपदा प्रबंधन विभाग ने 24 घंटे कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है.
आपात स्थिति में ग्रामीण 06252-242418 पर सूचना दे सकते हैं. प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और समय पर प्रशासन को सूचना देने की अपील की है.
हर साल इन नदियों से बढ़ती है परेशानी
पूर्वी चंपारण में बाढ़ की सबसे बड़ी वजह गंडक, सिकरहना (बूढ़ी गंडक), बागमती और लालबकेया नदियां हैं. नेपाल में भारी बारिश होने पर इन नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे तटबंधों पर दबाव बढ़ता है और आसपास के गांव प्रभावित होते हैं.
ये प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित
जिले के केसरिया, अरेराज, संग्रामपुर, सुगौली, बंजरिया, पताही और कल्याणपुर प्रखंड हर वर्ष बाढ़ की मार झेलते हैं. प्रशासन का कहना है कि इस बार पहले से की गई तैयारियों के जरिए संभावित नुकसान को कम करने का प्रयास किया जाएगा.
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