मोतिहारी: न खाना, न देखभाल… अंधेरे और अकेलेपन में गुजर रही बुजुर्गों की जिंदगी, वृद्धाश्रम की बदहाल तस्वीर

मोतिहारी के बरियारपुर स्थित वृद्धाश्रम में बुजुर्ग भोजन, देखभाल और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं. रसोई बंद है, इनवर्टर खराब पड़ा है और कई वृद्ध भूखे सोने को मजबूर हैं. पढ़ें पूरी खबर...

मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट

Motihari News: शहर के बरियारपुर स्थित वृद्धाश्रम की दीवारों के भीतर इन दिनों ऐसी खामोशी पसरी है, जो वहां रह रहे बुजुर्गों की पीड़ा बयां कर रही है. करीब 16 महीने पहले बड़े दावों और सुविधाओं के वादों के साथ शुरू हुआ यह वृद्धाश्रम अब बदहाली और उपेक्षा का शिकार हो चुका है.

जिस उम्र में इंसान को सहारे, सम्मान और अपनापन की जरूरत होती है, उसी उम्र में यहां रह रहे बुजुर्ग दो वक्त की रोटी और देखभाल के लिए तरस रहे हैं.

रसोई बंद, खुद भोजन का इंतजाम करने को मजबूर

स्थानीय लोगों और आश्रम में रह रहे बुजुर्गों के अनुसार, शुरुआत में यहां रसोइया और गार्ड की व्यवस्था की गई थी. लेकिन महीनों तक वेतन नहीं मिलने के कारण दोनों ने काम छोड़ दिया.

इसके बाद से वृद्धाश्रम की व्यवस्था लगभग ठप हो गई. अब बुजुर्ग खुद ही किसी तरह भोजन की व्यवस्था करते हैं. कई बार समय पर खाना नहीं मिल पाता और कई वृद्ध भूखे ही सोने को मजबूर हो जाते हैं.

आश्रम में रह रहे श्याम कुमार श्रीवास्तव ने कहा, “जब इस आश्रम का उद्घाटन हुआ था, तब लगा था कि अब जिंदगी कुछ सुकून से कटेगी. लेकिन अब यहां कोई देखने वाला नहीं है. खाना बनाने वाला भी नहीं है और देखभाल करने वाला भी कोई नहीं. जैसे-तैसे दिन गुजर रहा है.”

अंधेरे और गर्मी में गुजर रही रातें

गर्मी के मौसम में बुजुर्गों की परेशानी और बढ़ गई है. बिजली कटते ही पूरा आश्रम अंधेरे में डूब जाता है. राहत देने वाला इनवर्टर भी लंबे समय से खराब पड़ा है.

रात में बुजुर्ग गर्मी और अंधेरे के बीच जागकर रात बिताने को मजबूर हैं. मनोरंजन के लिए लगाया गया टीवी भी महीनों से खराब पड़ा है. दिनभर बुजुर्ग सूने कमरों और खामोश दीवारों के बीच बैठे रहते हैं.

बेतिया भेजे जाने की खबर से बढ़ी चिंता

आश्रम में रह रहे वृद्धों का कहना है कि नगर निगम और प्रशासन की ओर से उन्हें बेतिया भेजे जाने की बात कही जा रही है. इस खबर ने उनकी चिंता और बढ़ा दी है.

एक बुजुर्ग ने नम आंखों से कहा, “हम लोगों ने सोचा था कि यहां जिंदगी का आखिरी समय शांति से कट जाएगा, लेकिन अब यहां से भी जाने की बात हो रही है. आखिर हम जाएं तो कहां जाएं?”

दावों और हकीकत के बीच फंसे बुजुर्ग

स्थानीय लोगों का कहना है कि बुजुर्गों की सेवा और देखभाल को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े-बड़े दावे तो करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है.

बरियारपुर स्थित यह वृद्धाश्रम आज व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुका है. यहां रह रहे बुजुर्गों की सबसे बड़ी मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें दो वक्त का भोजन, थोड़ी देखभाल और सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिल जाए.

अब सवाल यह है कि आखिर इन बुजुर्गों की सुध कौन लेगा? क्या प्रशासन उनकी पीड़ा को समझ पाएगा या फिर सहारे की तलाश में आए ये बुजुर्ग यूं ही उपेक्षा के अंधेरे में जिंदगी काटते रहेंगे.

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लेखक के बारे में

Published by: Sarfaraz Ahmad

सरफराज अहमद IIMC से प्रशिक्षित पत्रकार हैं. राजनीति, समाज और हाइपरलोकल मुद्दों पर लिखते हैं. क्रिकेट और सिनेमा में गहरी रुचि रखते हैं. बीते तीन वर्षों से मीडिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत हैं।

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