Motihari News: भ्रष्टाचार और विभिन्न गड़बड़ियों को लेकर हमेशा से विवादों में रहने वाला मोतिहारी सदर अंचल कार्यालय एक बार फिर जिले में बड़े सियासी और प्रशासनिक भूचाल का केंद्र बन गया है. लगातार सामने आ रहे संगीन मामलों की वजह से सुर्खियों में रहने वाले इस अंचल में इस बार सीधे भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) न्यायालय के फैसले के साथ ही फर्जीवाड़ा कर दिया गया. भू-माफियाओं ने डीसीएलआर कोर्ट का कथित जाली (फर्जी) अपील आदेश डिक्री तैयार कर करोड़ों की जमीन का दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) करा लिया. इस महा-फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ होने के बाद नगर परिषद के कर्मचारी कन्हैया कुमार ने छतौनी थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दिया है, जिससे प्रशासनिक महकमे और राजस्व कर्मियों में हड़कंप मच गया है.
रसूखदार लाभार्थियों के नाम छिपाने पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे हाई-प्रोफाइल जमीन घोटाले में सबसे हैरान करने वाला और संदेहास्पद पहलू यह है कि जिन दो रसूखदार लोगों को इस कथित फर्जी अपील आदेश के आधार पर म्यूटेशन का सीधा लाभ दिया गया, उनके नामों को अंचल कार्यालय द्वारा बेहद चालाकी से गोपनीय रखा गया है. एफआईआर के आवेदन और विभागीय स्तर पर लाभार्थियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए जाने से मोतिहारी के राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं और कयासबाजी शुरू हो गई है. सजग नागरिकों और बुद्धिजीवियों का सीधा सवाल है कि यदि जांच में जालसाजी और जालसाज दस्तावेज पूरी तरह साबित हो चुके हैं, तो अंचल प्रशासन उन सफेदपोश अपराधियों और लाभार्थियों की पहचान उजागर करने से क्यों कतरा रहा है? क्या इसके पीछे किसी बड़े सिंडिकेट को बचाने की साजिश है?
जांच तंत्र फेल
अंचल सूत्रों से मिली अंदरूनी और पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस पूरे खेल की स्क्रिप्ट बेहद शातिराना अंदाज में लिखी गई:
- कर्मचारी की संदेहास्पद भूमिका: सबसे पहले डीसीएलआर कोर्ट की जाली अपील कॉपी को बिना किसी आधिकारिक सत्यापन या ऑनलाइन क्रॉस-चेक किए संबंधित राजस्व कर्मचारी कन्हैया कुमार ने म्यूटेशन के लिए अपनी अनुकूल रिपोर्ट लगा दी.
- आंखें मूंदकर हुई अनुशंसा: कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर राजस्व अधिकारी (RO) ने भी बिना मूल फाइल और डिक्री नंबर का मिलान किए आंखें मूंदकर म्यूटेशन की अनुशंसा (फॉरवर्ड) कर दी.
- छुट्टी पर जाने से पहले CO का फरमान: इसके बाद, अवकाश पर जाने से ठीक पहले तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) के स्तर से इस विवादित और फर्जी दाखिल-खारिज याचिका का अंतिम निष्पादन (एप्रूवल) भी कर दिया गया.
हैरत की बात यह है कि ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक डिजिटल व्यवस्था होने के बावजूद पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी भी टेबल या स्तर पर इस अति-संवेदनशील दस्तावेज की प्रामाणिकता की जांच करने की जहमत नहीं उठाई गई, जो अंचल कर्मियों की सीधी मिलीभगत की ओर इशारा करता है.
डीसीएलआर के औचक निरीक्षण और जांच में खुला अंचल का काला खेल
इस सुनियोजित जमीन घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब सदर मोतिहारी की तेजतर्रार डीसीएलआर प्रीति कुमारी ने संबंधित विवादित भूमि वादों और म्यूटेशन अपीलों की रैंडमली भौतिक जांच (फाइल स्क्रूटनी) शुरू की. गहन जांच के दौरान जब उन्होंने अपने ही न्यायालय के मूल रिकॉर्ड रूम से संबंधित आदेश संख्या और तिथि का मिलान कराया, तो अंचल कार्यालय में जमा की गई कॉपी पूरी तरह फर्जी और कूट रचित पाई गई. पत्रों के हस्ताक्षर और ज्ञापांक-दिनांक सब जाली थे. इसके बाद अंचल के भीतर फर्जी दस्तावेजों के समानांतर सिंडिकेट चलने की आशंका सच में बदल गई.
अपराधी सीधे जाएंगे जेल
मामले पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए डीसीएलआर सदर प्रीति कुमारी ने बताया कि जमीन म्यूटेशन में मेरे न्यायालय के फर्जी आदेश पत्र का इस्तेमाल करने का मामला पूरी तरह सत्य पाया गया है. विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करने के बाद संबंधित अंचल कर्मचारी को तत्काल स्थानीय छतौनी थाने में नामजद प्राथमिकी दर्ज कराने का कड़ा लिखित निर्देश दिया गया है.
उन्होंने साफ किया कि इस जालसाजी में जो भी भू-माफिया, बिचौलिए या अंचल के कर्मचारी संलिप्त होंगे, पुलिसिया जांच के बाद उन सभी पर कानून का शिकंजा कसेगा और वे सीधे जेल जाएंगे. बहरहाल, इस बड़े खुलासे ने मोतिहारी सदर अंचल की कार्यप्रणाली, दस्तावेज सत्यापन की ढीली व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर कई गंभीर और अनुत्तरित सवाल खड़े कर दिए हैं.
मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट
