Motihari News: सदर प्रखंड के अंतर्गत विभिन्न पंचायतों में मनरेगा योजनाओं में कार्यरत मेटों का भुगतान बाधित होने से उनकी परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. समय पर मानदेय नहीं मिलने के कारण ये कर्मी अपने हक की कमाई के लिए जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.
बासमनपुर पंचायत का मामला आया सामने, ऑनलाइन काम के बाद भी भुगतान नहीं
भुगतान में हो रही इस लेत-लतीफी का एक बड़ा मामला सदर प्रखंड की बासमनपुर पंचायत से सामने आया है. यहां के मेट दयानंद द्वारा कई सरकारी योजनाओं का फोटो अपलोड करने, मजदूरों की दैनिक हाजिरी ऑनलाइन दर्ज करने और पूरी रिपोर्ट तैयार करने का काम समय पर किया गया. हालांकि, कार्य पूरा होने के बावजूद अब तक उन्हें मानदेय की राशि नहीं मिल सकी है, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
पंचायत स्तर पर चयन और प्रतिदिन 300 से 400 रुपये मानदेय का है प्रावधान
नियमों के अनुसार, मनरेगा के तहत कार्यों की निगरानी के लिए पंचायतवार मेट का चयन किया गया है. इनका मुख्य काम कार्यस्थल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करना, काम की निगरानी, जियो-टैगिंग (फोटो लेना) और ऑनलाइन रिपोर्टिंग करना होता है. इस काम के बदले मेटों को प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 300 से 400 रुपये तक भुगतान किए जाने का प्रावधान है. इसके बावजूद महीनों तक भुगतान लटका कर रखा जाता है.
बोले अधिकारी: बकाया वाले दें आवेदन, होगा भुगतान
स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित कर्मियों ने मनरेगा के वरिष्ठ अधिकारियों से इस लंबित भुगतान को जल्द से जल्द क्लीयर कराने की मांग की है. इस मामले पर मोतिहारी सदर प्रखंड के पीओ जीवन चंद्रा ने बताया कि मेट का भुगतान नियमानुसार किया जाता है. अगर कोई मेट तीन स्कीमों पर काम करता है, तो एक स्कीम से भुगतान का प्रावधान है. उन्होंने कहा कि जिन भी मेटों का मानदेय बकाया है, वे कार्यालय में आवेदन दें, जांच कर भुगतान कराया जाएगा.
मोतिहारी से सामंत कुमार गौतम की रिपोर्ट
