मोतिहारी से सच्चिदानंद सत्यार्थी की रिपोर्ट
Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले के ढाका विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों राजनीतिक हलचल काफी तेज है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के स्थानीय विधायक फैसल रहमान अपने राजनीतिक कदमों को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं. पिछले चुनाव में महज 178 वोटों के मामूली अंतर से जीत दर्ज करने वाले फैसल रहमान का मामला कोर्ट तक पहुंचा था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर पूर्व भाजपा विधायक पवन जायसवाल और उनके समर्थकों के बीच जीत-हार के दावे प्रतिदावे चलते रहे हैं.
नीतीश कुमार से मुलाकात और राज्यसभा चुनाव में दूरी के बाद बढ़े कयास
इस बीच फैसल रहमान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और फिर नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलकर क्षेत्र की समस्याएं रखीं. इसके बाद राज्यसभा चुनाव के दौरान खुद को वोटिंग की प्रक्रिया से पूरी तरह अलग रखकर उन्होंने सबको चौंका दिया था. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में तटस्थ रहने के कारण ही सरकार ने उन्हें गैर-सरकारी विधेयक संकल्प समिति का सभापति बनाया. तभी से वे बिहार और ढाका की राजनीति के केंद्र में हैं. चर्चा है कि राजद में होने के बावजूद एनडीए गठबंधन के बड़े नेताओं से उनके बेहद मधुर संबंध हैं.
प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार और सांसद लवली आनंद के साथ मंच साझा करने से हैरान हुए लोग
सियासी गलियारों में चर्चा तब और तेज हो गई जब 2 जून को ढाका के गवन्द्री में सरकारी स्तर पर आयोजित पंचायत सहयोग समिति के शिविर में वे अचानक पहुंच गए. इस कार्यक्रम में जिला प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार, जदयू सांसद लवली आनंद और जदयू एमएलसी खालिद अनवर पहले से मंचासीन थे. राजद विधायक की इस औचक एंट्री ने वहां मौजूद लोगों और राजनीतिक पंडितों को अचंभित कर दिया, जिसके बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं.
विधायक ने दी सफाई: राजद में थे और हैं, जनता के काम के लिए गया था शिविर
एनडीए नेताओं के साथ मंच साझा करने के बाद जब फैसल रहमान से इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने तमाम कयासों पर विराम लगाने की कोशिश की. राजद विधायक ने साफ तौर पर कहा कि यह शिविर पूरी तरह सरकारी था, जो आम जनता की समस्याओं से जुड़ा था. चूंकि यह कार्यक्रम मेरे ही विधानसभा क्षेत्र में आयोजित था, इसलिए क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए जनता के साथ रहना कोई राजनीतिक मामला नहीं है. उन्होंने अंत में जोर देकर कहा कि हम राजद में थे और आज भी हैं.
