करोड़ों खर्च के बाद भी जलकुंभी से पटी मोतीझील, सौंदर्यीकरण पर उठे सवाल

मोतिहारी की शान मोतीझील एक बार फिर बदहाली का शिकार है. करोड़ों के बजट के बावजूद जलकुंभी से झील का दम घुट रहा है, जिससे जलीय जीवों और पर्यटन पर खतरा मंडरा रहा है. लाखों की मशीनें और फव्वारे भी बेकार पड़े हैं.

Motihari News: चंपारण की ऐतिहासिक धरोहर और मोतिहारी शहर की पहचान मानी जाने वाली मोतीझील एक बार फिर बदहाली की तस्वीर पेश कर रही है. नगर निगम और प्रशासन की ओर से हर साल सफाई और सौंदर्यीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद झील का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से पूरी तरह पट गया है. स्थानीय लोगों ने सफाई कार्य में लापरवाही और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.

जलकुंभी से घुट रहा झील का दम

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल जलकुंभी हटाने के नाम पर बड़े बजट स्वीकृत होते हैं, लेकिन कुछ दिनों तक दिखावटी सफाई के बाद काम बंद हो जाता है. नतीजतन कुछ ही समय में जलकुंभी दोबारा पूरे झील पर फैल जाती है. जलकुंभी के कारण पानी से दुर्गंध आने लगी है और जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है. इसके साथ ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों की आशंका भी बढ़ गई है.

बोटिंग और फाउंटेन सेवा भी हुई प्रभावित

करीब 15-20 दिन पहले तक जहां लोग मोतीझील में नौकायन का आनंद ले रहे थे, वहीं अब जलकुंभी के कारण बोटिंग लगभग बंद हो गई है. झील के बीच स्थापित फाउंटेन भी जलकुंभी से घिर गया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे पर्यटन गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और झील का आकर्षण लगातार कम हो रहा है.

करोड़ों की मशीन और फाउंटेन पड़े बेकार

करीब तीन वर्ष पहले जलकुंभी और गाद हटाने के लिए लगभग दो करोड़ रुपये की लागत से विशेष मशीन खरीदी गई थी. शुरुआती दिनों में मशीन से सफाई हुई, लेकिन बाद में तकनीकी खराबी के कारण उसका संचालन प्रभावित हो गया. इसी तरह करीब 20 लाख रुपये की लागत से लगाए गए तीन फाउंटेन भी कुछ समय चलने के बाद बंद हो गए. अधिकारियों का दावा है कि मशीन और फाउंटेन को जल्द चालू कराकर झील की सफाई दोबारा शुरू की जाएगी.

लोगों ने स्थायी समाधान की उठाई मांग

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जलकुंभी हटाने के लिए केवल अस्थायी उपाय नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और स्थायी योजना बनाई जाए. उनका कहना है कि मोतीझील शहर की धरोहर है और इसकी नियमित सफाई, जल संरक्षण तथा पर्यटन गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है.

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By Intejarul haq

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