Motihari News: मोतिहारी. जिले के मंगलापुर गांव के मूल निवासी और वर्तमान में श्रीकृष्ण नगर, मोतिहारी निवासी ब्रजेश राज ने अपनी अकादमिक उपलब्धि से जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है. आइआइटी खड़गपुर में अंतरराष्ट्रीय कानून में एलएलएम द्वितीय वर्ष के छात्र ब्रजेश राज के शोध-पत्र को 15वें एशियाई आर्थिक विकास अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मौखिक प्रस्तुति के लिए स्वीकृति मिली है. वह 23 सितंबर को थाईलैंड स्थित चियांग माई विश्वविद्यालय में आयोजित सम्मेलन में अपना शोध प्रस्तुत करेंगे.
सुरक्षा और संरक्षणवाद पर आधारित है शोध
ब्रजेश राज का शोध-पत्र ‘सुरक्षा और संरक्षणवाद के बीच धुंधली होती सीमा : एशियाई व्यापार व्यवस्था के विखंडन का आलोचनात्मक अध्ययन’ विषय पर आधारित है. शोध में एशियाई व्यापार व्यवस्था में सुरक्षा, संरक्षणवाद और व्यापारिक व्यवस्था के बढ़ते विखंडन के बीच बदलते संबंधों का अध्ययन किया गया है.
एशियाई व्यापार व्यवस्था की चुनौतियों का किया विश्लेषण
शोध-पत्र में बदलती वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक परिस्थितियों के बीच एशियाई व्यापार व्यवस्था के सामने उत्पन्न हो रही चुनौतियों का भी विश्लेषण किया गया है. इसके माध्यम से सुरक्षा और व्यापारिक हितों के बीच बदलते संबंधों तथा एशियाई व्यापार व्यवस्था पर पड़ रहे प्रभावों को समझने का प्रयास किया गया है.
23 सितंबर को थाईलैंड में देंगे मौखिक प्रस्तुति
ब्रजेश राज को अपने शोध-पत्र को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर मौखिक रूप से प्रस्तुत करने का अवसर मिला है. 23 सितंबर को थाईलैंड के चियांग माई विश्वविद्यालय में आयोजित 15वें एशियाई आर्थिक विकास अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वह शोध-पत्र प्रस्तुत करेंगे. इस उपलब्धि से उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है.
विशेषज्ञों की दोहरी समीक्षा के बाद हुआ चयन
सम्मेलन की आयोजन समिति के अनुसार इस वर्ष बड़ी संख्या में शोध-पत्र प्राप्त हुए थे. सभी शोध-पत्रों का विशेषज्ञों की गुप्त दोहरी समीक्षा प्रक्रिया के माध्यम से मूल्यांकन किया गया. इस कठोर समीक्षा प्रक्रिया के बाद ब्रजेश राज के शोध-पत्र को मौखिक प्रस्तुति के लिए चयनित किया गया.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर मोतिहारी की उपलब्धि
ब्रजेश राज, राजेश सिंह के पुत्र हैं. आइआइटी खड़गपुर में अंतरराष्ट्रीय कानून की पढ़ाई के दौरान उनके शोध-पत्र का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के लिए चयन होना उनके शैक्षणिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलने से परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में हर्ष है.
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