Motihari: ''मेडले पीआर'' सॉफ्टवेयर पर इंज्यूरी रिपोर्ट अपलोड का काम शुरू

सदर अस्पताल में होने वाले इंज्यूरी रिपोर्ट को मेडिकल लीगल सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जा रहा है. पिछले सितंबर माह से इस प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है.

Motihari: मोतिहारी. सदर अस्पताल में होने वाले इंज्यूरी रिपोर्ट को मेडिकल लीगल सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जा रहा है. पिछले सितंबर माह से इस प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है. इनमें सदर अस्पताल में होने वाले इंज्यूरी रिपोर्ट को ”मेडले पीआर” यानी (मेडिकल लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्टमार्टम रिपोर्ट) सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जा रहा है. फिलहाल यह व्यवस्था करंट इंज्यूरी रिपोर्ट को अपलोड किया जा रहा है. जबकि बैकलॉग की रिपोर्ट भी साइट पर अपलोड करने की योजना है. जिसे धीरे-धीरे गति दिया जायेगा. लेकिन इस व्यवस्था के तहत पोस्टमार्टम रिपोर्ट अपलोड करने का काम अब भी पेंडिंग चल रहा है. ”मेडले पीआर” सॉफ्टवेयर पर इंज्यूरी व पोस्टमार्टम दोनों की रिपोर्ट अपलोड करना है. बताया जाता है कि सॉफ्टवेयर में पोस्टमार्टम रिपोर्ट डालने में पुलिस जांच रिपोर्ट से संबंधित कुछ सूचनाओं की भी आवश्यकता है. लेकिन पुलिस उस सूचना को अबतक उपलब्ध कराने में पिछे है. ऐसे में रिपोर्ट अधूरा रहने के कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने में आड़े आ रही है. सदर अस्पताल उपाधीक्षक डॉ एसएन सत्यार्थी ने बताया कि इसको लेकर पुलिस विभाग से संपर्क स्थापित किया गया है. वही उन्हें ससमय सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिये गये है. ताकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी ”मेडले पीआर” पर अपलोड किया जा सके. कहा कि करंट इंज्यूरी रिपोर्ट नियमित रूप से अपलोड किया जा रहा है. बैकलॉग रिपोर्ट को भी अपलोड किया जायेगा.

पुलिस और डॉक्टर दोनों को राहत

सॉफ्टवेयर संचालित होते ही पुलिस एवं डाक्टर दोनों को राहत मिला है. सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम विभाग के डॉक्टर को ही शव का पोस्टमार्टम कर रिपोर्ट को सॉफ्टवेयर पर डालने की जवाबदेही दी गयी है. ”मेडले पीआर” सॉफ्टवेयर का संचालन कैसे किया जाना है. इससे संबंधित विडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से डाक्टर को प्रशिक्षण भी दिया गया है. वही इंज्यूरी रिपोर्ट को भी अपलोड किया जा रहा है.

परिजन एवं पुलिस लगाती है चक्कर

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के लिए परिजन के साथ पुलिस को सदर अस्पताल के इंज्यूरी व पोस्टमार्टम विभाग का चक्कर लगाना पड़ता है. एक रिपोर्ट के लिए 15 दिन का समय लग जाता है. कई मामले में तो महिनों तक लोगों को पोस्टमार्टम के लिए इंतजार करना पड़्ता है. जिससे पुलिस एवं परिजन परेशान हो जाते है. इस नयी व्यवस्था के आरंभ होने से लोगों को चक्कर लगाने से राहत मिली है.

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