Motihari: 7 साल से मुस्लिम भाइयों को राखी बांध रही हिंदू बहन, मोतिहारी में भाईचारे की मिसाल

मोतिहारी में भाई-बहन के अनूठे रिश्ते की कहानी, जहां एक हिंदू बहन पिछले 7 सालों से अपने मुस्लिम भाइयों की कलाई पर राखी बांध रही है. यह मजहब से ऊपर उठकर प्रेम और विश्वास की एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करती है.

Motihari News: राखी का धागा केवल भाई-बहन की कलाई को नहीं बांधता, बल्कि दिलों को भी जोड़ता है. मोतिहारी में रक्षाबंधन के अवसर पर भाईचारे और आपसी सद्भाव की ऐसी ही खूबसूरत मिसाल देखने को मिली. यहां हिंदू बहन कोमल आर्या पिछले करीब सात वर्षों से मुस्लिम भाइयों अर्श और अरहम की कलाई पर राखी बांध रही हैं.

सात साल से कायम है भाई-बहन का रिश्ता

कोमल आर्या और अर्श-अरहम के बीच भाई-बहन का यह रिश्ता करीब सात वर्षों से कायम है. करीब दो वर्षों से तीनों अलग-अलग जगहों पर रह रहे हैं, लेकिन दूरी भी इस रिश्ते की गर्माहट को कम नहीं कर सकी.

हर रक्षाबंधन पर अर्श और अरहम अपनी बहन कोमल के पास राखी बंधवाने पहुंचते हैं. इस बार भी रक्षाबंधन के अवसर पर कोमल ने दोनों भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उनकी लंबी उम्र व खुशहाली की कामना की.

भाइयों ने बहन की सुरक्षा का दिया भरोसा

राखी बंधवाने के बाद अर्श और अरहम ने भी अपनी बहन को हर परिस्थिति में उसकी सुरक्षा करने और उसके साथ खड़े रहने का वचन दिया.

रक्षाबंधन के इस मौके पर तीनों के बीच वर्षों से बने भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता और अपनापन साफ नजर आया. यह रिश्ता मजहब की सीमाओं से ऊपर उठकर आपसी प्रेम और विश्वास की मिसाल पेश करता है.

मोतिहारी में पोस्टिंग के दौरान हुई थी पहचान

अर्श और अरहम के पिता वाहिद मंजर ने बताया कि उनका परिवार नौकरीपेशा है. मोतिहारी में पोस्टिंग होने के बाद उनका परिवार बरियारपुर चीनी मिल के समीप किराये के मकान में रहने आया था.

इसी दौरान कोमल के परिवार से उनकी पहचान हुई. धीरे-धीरे दोनों परिवारों के बीच आत्मीय संबंध बन गए और कोमल का अर्श व अरहम के साथ भाई-बहन जैसा रिश्ता कायम हो गया.

दूरी बढ़ी, लेकिन रिश्ते में नहीं आई कमी

समय के साथ परिवार अलग-अलग जगहों पर रहने लगे. करीब दो वर्षों से भौगोलिक दूरी के बावजूद अर्श, अरहम और कोमल का रिश्ता पहले की तरह बना हुआ है.

रक्षाबंधन पर हर साल होने वाली यह मुलाकात इस रिश्ते को और मजबूत करती है. मोतिहारी की यह कहानी प्रेम, विश्वास और सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है.

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लेखक के बारे में

By सामंत कुमार गौतम

सामंत वर्ष 2013 से यानी पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वाणिज्य (बी.कॉम) और कानून (एलएलबी) स्नातक सामंत को समाचार संकलन, संपादन, कंप्यूटर तकनीक और समाचार प्रबंधन का व्यापक अनुभव है. ये पत्रकारिता के साथ-साथ समाचारों के तकनीकी व प्रबंधकीय कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं.

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