Motihari News: मोतिहारी के सरोजा सीताराम सदर अस्पताल की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे ओपीडी (बाह्य रोगी विभाग) का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान अस्पताल में भारी अव्यवस्था उजागर हुई. निरीक्षण के वक्त अधिकांश ओपीडी कक्ष खाली पड़े मिले और रोस्टर के अनुसार ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर अपने केबिन से गायब पाए गए, जबकि बाहर दूर-दराज से आए मरीजों की लंबी कतार लगी हुई थी. इस गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए सिविल सर्जन ने ड्यूटी से नदारद 7 मुख्य चिकित्सकों और 4 इंटर्न डॉक्टरों का वेतन काटने का सख्त निर्देश दिया है.
ओपीडी में लगी थी कतार, केबिन से गायब मिले डॉक्टर
अस्पताल के औचक निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने पाया कि सुबह के पीक समय में भी ओपीडी के अधिकांश केबिन में सन्नाटा पसरा हुआ था.
मरीज और उनके तीमारदार इलाज की आस में डॉक्टर के आने का इंतजार कर रहे थे. चिकित्सकों की इस तरह की गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली पर सिविल सर्जन ने गहरा असंतोष और कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिया कि जितने भी नियमित चिकित्सक और इंटर्नशिप वाले डॉक्टर समय पर ड्यूटी पर नहीं पहुंचे हैं, उनकी हाजिरी काटते हुए उस दिन का वेतन रोकने की विधिक प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाए.
अनुपस्थित चिकित्सकों व इंटर्नशिप डॉक्टरों की सूची
निरीक्षण के दौरान ओपीडी ड्यूटी से गायब पाए गए मुख्य चिकित्सकों और इंटर्न डॉक्टरों की सूची जारी की गई है:
- ड्यूटी से नदारद 7 मुख्य चिकित्सक: डॉ. मोहसिना हकीम, डॉ. रोहित कुमार, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. प्रियम सिंह, डॉ. उमेश कुमार, डॉ. बृजेश सुमन और डॉ. अजीत कुमार.
- गायब मिले 4 इंटर्नशिप डॉक्टर: डॉ. मणि भूषण भारती, डॉ. विनीता कुमारी मीणा, डॉ. सृष्टि रंजन और डॉ. कृष्णकांत.
गरीबों के इलाज में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, बायोमेट्रिक उपस्थिति का सख्त निर्देश
सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद मरीज सुदूर ग्रामीण इलाकों से इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं. समय पर डॉक्टरों का न पहुंचना मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है.
उन्होंने अस्पताल के सभी चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक प्रणाली और ड्यूटी रोस्टर का अक्षरशः पालन करने का निर्देश दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा पाए जाने पर संबंधित चिकित्सकों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर और भी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
