Raxaul Nagar Parishad: रक्सौल. नगर परिषद रक्सौल में मुख्य पार्षद का पद पिछले 398 दिनों से रिक्त है. तत्कालीन मुख्य पार्षद धूरपति देवी को नगर विकास एवं आवास विभाग ने 6 अगस्त 2025 को पद से हटा दिया था. इसके बाद अब तक इस रिक्त पद के लिए उपचुनाव नहीं हो सका है. एक साल से अधिक समय से निर्वाचित मुख्य पार्षद के बिना नगर परिषद के संचालन को लेकर अब पार्षदों और शहरवासियों में भी सवाल उठने लगे हैं.
6 अगस्त 2025 से खाली है मुख्य पार्षद का पद
तत्कालीन मुख्य पार्षद धूरपति देवी को पद से हटाये जाने के बाद रक्सौल नगर परिषद में मुख्य पार्षद का पद रिक्त हो गया. 6 अगस्त 2025 से 8 सितंबर 2026 तक कुल 398 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक रिक्त पद के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है.
लंबे समय तक निर्वाचित मुख्य पार्षद का पद खाली रहने से नगर परिषद के कामकाज और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गयी है.
कानून में आकस्मिक रिक्ति भरने का प्रावधान
बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 23 में मुख्य पार्षद के पद की आकस्मिक रिक्ति को चुनाव के माध्यम से भरने का प्रावधान है. मृत्यु, इस्तीफा, पद से हटाये जाने या अन्य कारणों से पद रिक्त होने की स्थिति में रिक्ति भरने के लिए निर्वाचन कराया जाना है.
राज्य निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर बिहार नगरपालिका अधिनियम और नगरपालिका निर्वाचन नियमावली भी उपलब्ध है. ऐसे में रक्सौल नगर परिषद में रिक्त पद पर चुनाव को लेकर अब प्रक्रिया की स्थिति पर सवाल उठाये जा रहे हैं.
राज्य निर्वाचन आयोग में भी हुई सुनवाई
धूरपति देवी को पद से हटाये जाने के बाद इस मामले में राज्य निर्वाचन आयोग, पटना में वाद संख्या 16/2025 की सुनवाई हुई. आयोग ने 28 अप्रैल 2026 को अपने अंतिम निर्णय में धूरपति देवी को पदधारण के लिए अयोग्य घोषित कर दिया.
आयोग के इस फैसले को भी चार महीने से अधिक समय बीत चुका है. इसके बावजूद मुख्य पार्षद के रिक्त पद के लिए अब तक चुनाव कार्यक्रम सामने नहीं आया है.
पार्षदों में बढ़ रहा असंतोष
मुख्य पार्षद का पद लंबे समय तक खाली रहने से निर्वाचित पार्षदों में भी असंतोष बढ़ने की बात सामने आ रही है. पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद के कामकाज में मुख्य पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
विकास योजनाओं की प्राथमिकता तय करने, विभिन्न प्रस्तावों पर समन्वय बनाने और शहर की समस्याओं को लेकर नेतृत्व देने में मुख्य पार्षद की भूमिका रहती है. ऐसे में लंबे समय तक रिक्ति को लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच नाराजगी बढ़ रही है.
सड़क, नाला और जलजमाव जैसी समस्याएं भी बनी चुनौती
नगर क्षेत्र में सड़क, नाला, जलजमाव, सफाई और रोशनी समेत कई विकासात्मक जरूरतें लगातार बनी हुई हैं. शहरवासियों का कहना है कि इन मुद्दों पर प्रभावी नेतृत्व और नियमित समन्वय जरूरी है.
ऐसे में मुख्य पार्षद का पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण नगर परिषद की राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभावशीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
अब सबसे बड़ा सवाल- उपचुनाव कब होगा?
पदमुक्ति की कार्रवाई, राज्य निर्वाचन आयोग में सुनवाई और अंतिम निर्णय के बावजूद रिक्त पद पर चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं होने से अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि रक्सौल नगर परिषद को नया निर्वाचित मुख्य पार्षद कब मिलेगा.
हालांकि, तत्कालीन सभापति धूरपति देवी ने अपने पद से हटाये जाने के निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालय में वाद दायर किया है. उन्होंने पदमुक्ति की प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णय को चुनौती दी है. यह मामला फिलहाल उच्च न्यायालय में विचाराधीन है.
अब पार्षदों और शहरवासियों की निगाह राज्य निर्वाचन आयोग और नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर है कि उपचुनाव की अधिसूचना कब जारी होती है.
