शिक्षा विभाग ने ‘भूत’ से मांगी एबसेंट रिपोर्ट, पूरा मामला जानकर माथा पीट लेंगे आप

Bihar Teacher: मोतिहारी में शिक्षा विभाग ने दो मृत शिक्षकों को नोटिस भेजते हुए स्कूल में उपस्थित न होने का जवाब मांगा है. विभाग की इस लापरवाही के बाद सिस्टम पर कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हैं. पढ़ें पूरी खबर…

Bihar Teacher: बिहार के मोतिहारी में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है, जहां विभाग ने दो मृत शिभकों से 24 घंटे के भीतर अनुपस्थिति पर जवाब मांगा है. जिन शिक्षकों से विभाग ने जवाब मांगा है, उनमें अरेराज की शिक्षिका उर्मिला कुमारी, फेनहरा के टीचर श्रीधर कुमार झा शामिल हैं. उर्मिला की मौत एक साल पहले हो चुकी है. वहीं, श्रीधर का निधन दो महीने पहले हुआ था. इस घटना ने पूरे सिस्टम की कमियां उजागर कर दी हैं. मामला अरेराज और फेनहारा प्रखंड का बताया जा रहा है.

यहां पूरा मामला समझिए…

जानकारी के अनुसार, 3 अप्रैल को डीईओ संजीव कुमार ने ई-शिक्षा कोष ऐप के माध्यम से जिले के स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति जांची. इस दौरान विभाग ने पाया कि 969 शिक्षक अनुपस्थित थे. 265 शिक्षकों ने बिना परमिशन ऑन ड्यूटी मार्क किया. 5764 शिक्षकों ने उपस्थिति दर्ज की, लेकिन आउट नहीं किया. इसी प्रक्रिया में मृत शिक्षकों के नाम भी गैरहाजिर शिक्षकों की लिस्ट में शामिल हो गया. उनके नाम पर भी नोटिस जारी हो गया.

दोनों प्रखंडों के बीईओ से मांगा गया स्पष्टीकरण

डीपीओ स्थापना साहेब आलम ने कहा कि यह टेक्निकल खामी के हुआ है. उनका कहना है कि डा़टा अपडेट नहीं होने की वजह से यह गलती हुई है. उन्होंने कहा कि प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापकों की थी, उन्हें मृत शिक्षकों का डेटा हटाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. अब विभाग ने इसपर कार्रवाई करते हुए दोनों प्रखंडों के बीईओ से भी स्पष्टीकरण मांगा है.

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By Aniket kumar

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अपने पत्रकारिता करियर में उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को जमीनी स्तर पर कवर किया है. प्रभात खबर के साथ बिहार विधानसभा चुनाव कवरेज के दौरान उन्होंने करीब 50 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया, जहां मतदाताओं से सीधे संवाद किया और प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में चौपाल कार्यक्रम किए. नेताओं से सीधे सवाल पूछने के साथ उन्होंने जनता के बीच जाकर कई जमीनी मुद्दों को वीडियो रिपोर्ट के जरिए सामने रखा. चुनाव के दौरान अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में समय बिताने और लोगों के बीच रहकर रिपोर्टिंग करने के अनुभव उन्हें डेस्क पर खबरों को बेहतर संदर्भ के साथ समझने और प्रस्तुत करने में मदद करते हैं.

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