एक राइस मिलर बाजार से चावल खरीद कर करते है सप्लाई

जिले के राइस मिलर पर खुले बाजार और बाहर से चावल मंगवाकर सीएमआर के रूप में पैक्स अध्यक्षों का उपलब्ध कराने का आरोप लगता रहा है.

सीतामढ़ी. जिले के राइस मिलर पर खुले बाजार और बाहर से चावल मंगवाकर सीएमआर के रूप में पैक्स अध्यक्षों का उपलब्ध कराने का आरोप लगता रहा है. उक्त मुद्दा सहकारिता बैंक की अध्यक्ष मधुप्रिया द्वारा भी उठाया गया था. तब आरोप को बहुत सारे लोग मनगढ़ंत बताए थे, लेकिन अब जांच में यह बात सच निकली है कि मिलर बाहर से चावल मंगवाकर पैक्स को आपूर्ति करते है. सदर एसडीओ संजीव कुमार ने एक मिलर के बारे में डीएम को रिपोर्ट किया है.

पूजा राइस मिल पर सवाल

बाहर से चावल मंगवाकर पैक्स को आपूर्ति करने के मामले में शहर से सटे पूजा राइस मिल का नाम सामने आया है. दरअसल, सदर एसडीओ कुमार ने उक्त मिल की जांच कर डीएम को सौंपी रिपोर्ट में उस बात का जिक्र किया है, यह मिलर धान की कुटाई नही करता है. जांच में मिल में 97 बैग अरवा चावल, 82 क्विंटल उसना चावल व करीब 36 हजार बैग धान पाया गया. रिपोर्ट के अनुसार, प्रथमदृष्टया उक्त धान काफी दिनों से रखा पाया गया. उनका मानना है कि मिलर धान की कुटाई न कर चावल बाजार से क्रय कर उपलब्ध कराया जा रहा है. उन्होंने मिलर द्वारा किये गये भुगतान का बैंक से जांच कराने की अनुशंसा की है.

पूर्व में एक मिलर पर उठा था सवाल

गौरतलब है कि सहकारिता बैंक की अध्यक्ष मधुप्रिया ने पूर्व में सीएम को आवेदन देकर जिले के एक मिलर पर उसना चावल के बदले अरवा चावल की आपूर्ति करने का आरोप लगाया था. साथ ही कहा था कि उक्त मिलर द्वारा पश्चिम बंगाल से चावल मंगाकर यहां सीएमआर के रूप में आपूर्ति की जाती है। इसकी पुष्टि के लिए सीएमआर गोदाम में उपलब्ध चावल, डीलर के गोदाम में उपलब्ध चावल व डीलर के यहां से वितरित चावल की जांच कराने की मांग की थी।

पैक्स में भूमिहीन किसान ने बेच डाला धान!

जिले में धान की खरीद 15 फरवरी 25 को संपन्न हो गया. खरीद में हर वर्ष किसी न किसी प्रखंड से गड़बड़ी से खबरें आती रही है. इस वर्ष भी सामने आया है. रीगा प्रखंड में जहां एक पैक्स अध्यक्ष द्वारा धान के एवज में किसानों को निर्धारित राशि से 400 कम देने की बात सामने आई है, तो डुमरा प्रखंड में तो हद ही हो गया है. यहां के मेथौरा पंचायत में भूमि विहीन एक किसान ने भी धान बेचा है. पंचायत के सूरज प्रसाद ने डीएम से शिकायत की है. बताया है कि पैक्स अध्यक्ष द्वारा किसानों से मिलीभगत कर धान की खरीद में गड़बड़ी की गई है. वैसे भी किसान से धान खरीद कर ली गई है, जिनके पास खेती योग्य भूमि ही नहीं है. इनमें एक किसान रामानंद प्रसाद भी शामिल है. सूरज प्रसाद की माने, तो धान खरीद बिक्री की ऑनलाइन रिपोर्ट में खाता- 625, खेसरा- 25 में रकवा- 2.98 एकड़ दर्ज है, जबकि राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के वेबसाइट पर प्रदर्शित रकवा शून्य है. इस तरह के कई मामलों का जिक्र आवेदन में किया गया है.

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By Prabhat Khabar News Desk

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