मधुबनी: कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न सिर्फ शारीरिक हरकत नहीं, अवांछित व्यवहार भी कानून के दायरे में

मधुबनी में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान पर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम के प्रावधानों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें शारीरिक उत्पीड़न के साथ-साथ अवांछित टिप्पणियों और संदेशों को भी शामिल किया गया.

मधुबनी: कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ विमेन, मिशन शक्ति, मधुबन महिला एवं बाल विकास निगम के तत्वावधान में सीता मुरलीधर प्लस टू उच्च विद्यालय बसैठा में जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गयी. इसमें महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध एवं निवारण अधिनियम के प्रावधानों और शिकायत प्रक्रिया की जानकारी दी गयी.

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा संस्थागत जिम्मेदारी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए जिला मिशन समन्वयक अंजनी कुमार झा ने कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक संस्थान की सामाजिक, नैतिक और संस्थागत जिम्मेदारी है.

उन्होंने अधिनियम के प्रावधानों को सरल एवं व्यावहारिक तरीके से समझाते हुए कहा कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का अर्थ केवल किसी महिला को शारीरिक रूप से परेशान करना नहीं है. अवांछित व्यवहार के कई अन्य स्वरूप भी इसके दायरे में आ सकते हैं.

अनुचित टिप्पणी से अशोभनीय संदेश तक दायरे में कई व्यवहार

अंजनी कुमार झा ने बताया कि अनुचित स्पर्श या शारीरिक निकटता के अलावा यौन प्रकृति की अवांछित टिप्पणियां या संकेत, अशोभनीय संदेश अथवा चित्र भेजना, यौन संबंध या यौन लाभ की मांग करना तथा ऐसा कोई भी अवांछित मौखिक, गैर-मौखिक या लिखित आचरण, जिससे महिला असहज, अपमानित, भयभीत अथवा असुरक्षित महसूस करे, गंभीरता से लिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न की रोकथाम के लिए केवल कानून की जानकारी पर्याप्त नहीं है. संस्थानों में संवेदनशीलता, जवाबदेही और सम्मानजनक व्यवहार की संस्कृति विकसित करना भी आवश्यक है.

उन्होंने शिक्षकों एवं कर्मियों से अपील की कि वे अपने संस्थान को ऐसा सुरक्षित और गरिमापूर्ण स्थान बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएं, जहां प्रत्येक महिला बिना भय या संकोच के अपने दायित्वों का निर्वहन कर सके.

शिकायत प्रक्रिया और संस्थान की जिम्मेदारियों की जानकारी

लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा ने प्रतिभागियों को POCSO अधिनियम के अंतर्गत शिकायत की प्रक्रिया, शिकायतों के निवारण की व्यवस्था, संस्था एवं नियोक्ता की जिम्मेदारियों तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के अधिकारों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार की अनदेखी करने के बजाय निर्धारित कानूनी एवं संस्थागत प्रक्रिया के माध्यम से उसका समाधान सुनिश्चित करना आवश्यक है.

शिक्षकों ने पूछे कानून से जुड़े सवाल

कार्यक्रम में जिला हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ विमेन के लैंगिक विशेषज्ञ शिवराम मेहरा, विद्यालय के प्रधानाध्यापक काशफूददूजा एवं कृष्ण कुमार झा, रामचन्द्र राम, अभिलाषा राजभर, विश्वनाथ प्रसाद, सुरेश कुमार भगत, सत्यवीर सिंह, सत्येन्द्र कुमार, रामबाबू कुमार, जितेंद्र पासवान, संतोष मंडल, शिल्पी कुमारी, सबाना परवीन, सुषमा कुमारी, राजकुमारी एवं संगम कुमारी पांडेय सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं.

प्रतिभागियों ने अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोग से जुड़े सवाल पूछे, जिनका अंजनी कुमार झा ने विस्तारपूर्वक समाधान किया.

कार्यशाला का उद्देश्य विद्यालय एवं अन्य कार्यस्थलों पर महिलाओं के प्रति सम्मान, समानता, गरिमा और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता बढ़ाना तथा संस्थागत संवेदनशीलता और जवाबदेही को मजबूत करना था.

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