Madhubani News : महाकवि को समर्पित विद्यापति कला उत्सव की हुई शुरुआत

निदेशक मिथिला चित्रकला संस्थान आनंद शर्मा ने मिथिला चित्रकला संस्थान के सभागार में बुधवार को किया.

मधुबनी.

महाकवि विद्यापति को स्मरणीय व सांस्कृतिक चेतना को समर्पित कला समागम पर आधारित दो दिवसीय विद्यापति कला उत्सव का उद्घाटन जिला पदाधिकारी सह निदेशक मिथिला चित्रकला संस्थान आनंद शर्मा ने मिथिला चित्रकला संस्थान के सभागार में बुधवार को किया. कार्यक्रम की शुरुआत में पद्मश्री दुलारी देवी, पद्मश्री शिवन पासवान, खेल पदाधिकारी नीतीश कुमार, डॉ. रानी झा, प्रतीक प्रभाकर, कनीय आचार्य, सुरेंद्र प्रसाद यादव, लेखा पदाधिकारी, विकास कुमार मंडल, रूपा कुमारी, विद्यापति परिचर्चा के वक्ता डॉ. निक्की प्रियदर्शी व भैरव लाल दास मंच पर मौजूद थे.

शुभारंभ मंगलाचरण नृत्य की प्रस्तुति के साथ हुई. जिसमें संस्थान की छात्रा बिंदी एवं मेधा झा ने अपनी शानदार प्रस्तुति दी. सृष्टि फाउंडेशन द्वारा दुर्गा स्तुति की प्रस्तुति ने सबों का मन मोह लिया. इसी कड़ी में जिला पदाधिकारी ने महाकवि विद्यापति के चित्र पर माल्यार्पण किया. मौके पर उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति भक्ति रस एवं श्रृगांर रस के महान कवि थे. उनकी भक्ति में इतनी शक्ति थी कि स्वयं भगवान शंकर को उगना के रूप में उनके घर आना पड़ा. उन्होंने विद्यापति की रचना कीर्तिलता एवं कीर्तिपताका का भी उल्लेख किया. उन्होंने चैतन्य महाप्रभु के बारे में भी अपने विचार व्यक्त किये. उन्होंने संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से कहा कि कोई भी काम इतनी लगन एवं मेहनत से करना चाहिए कि मुकाम हासिल हो जाए.

कवि विद्यापति पर परिचर्चा का आयोजन

कार्यक्रम में कवि विद्यापति पर परिचर्चा की शुरूआत वक्ता डा. निक्की प्रियदर्शनी ने किया. उन्होंने अपने संबोधन में सौराठ गांव, यहां के मैथिल समाज एवं यहां के कवियों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला. उन्होंने विद्यापति द्वारा रचित पदावलियों पर विशेष प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि महाकवि विद्यापति दूरदर्शी कवि थे. भैरव लाल दास ने महाकवि विद्यापति के वंशजो एवं उनके निवास स्थान के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि कवि विद्यापति की साहित्य, गीत आदि की चर्चा तो सभी करते हैं परन्तु चित्रकला से संबंध के बारे में कोई नहीं बताता. उन्होंने कहा कि विद्यापति पर आधारित पेंटिंग बहुत ही कम लोग बनाते हैं. जिसमें कर्पूरी देवी, कामिनी कश्यप एवं मृणाल सिंह प्रमुख है. उन्होंने कहा कि राधा का जिक्र सभी करते हैं मगर राधा का आगमन साहित्य में कब हुआ ये कोई नहीं जानता. उन्होनें कहा कि राधा का आगमन 12वी शताब्दी में हुआ था. उन्होनें छात्र-छात्राओं से कई प्रश्न भी किया. उन्होंने कहा कि मिथिला पेंटिंग के लिए साहित्य का ज्ञान बहुत जरूरी है और साहित्य का अध्ययन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मीराबाई, तुलसीदास, सूरदास महाकवि विद्यापति से प्रभावित थे उन्होनें कहा कि विद्यापति दुख, सुख, विरह, प्रेम, प्रकृति, भक्ति आदि सभी भाव में बसते थे और इन सभी से संबंधित रचनाएं, गीत उन्होंने लिखा है. कार्यक्रम में संस्थान के छात्र-छात्राओं ने भी प्रस्तुति दी.

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

कार्यक्रम के दूसरे चरण में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सांस्कृतिक कार्यक्रम में राजनीति रंजन सलोनी मल्लिक एवं सृष्टि फाउंडेशन ने नृत्य प्रस्तुत किया गया. मौके पर संस्थान में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं बिंदी कुमारी, पूजा कुमारी, काजल कुमारी, सुरभि कुमारी, नेहा कुमारी, अंजली कुमारी, कल्पना कुमारी, मुनकी कुमारी, साक्षी कुमारी, मेधा झा एवं श्री मनोज कुमार झा ने गायन व नृत्य प्रस्तुत किया.

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By GAJENDRA KUMAR

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