मधुबनी: जिला वासियों के लिए स्वास्थ्य विभाग से राहत भरी खबर है. सदर अस्पताल स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) गंभीर रूप से बीमार नवजातों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रहा है. पिछले एक साल के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र ने गंभीर स्थिति में भर्ती हुए नवजातों के इलाज में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है.
1250 नवजात भर्ती, 1099 का सफल इलाज
एसएनसीयू ने इलाज के मामले में बेहतर प्रदर्शन किया है. बीते एक वर्ष में यहां कुल 1250 नवजात शिशुओं को भर्ती कराया गया. स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों की मुस्तैदी से इनमें से 1099 नवजातों का सफल इलाज कर उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों को सौंपा गया.
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यह प्रदर्शन करीब 89 प्रतिशत सफलता दर को दर्शाता है. इसे जिला स्तर पर नवजात स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.
गंभीर बच्चों को किया गया रेफर, मृत्यु दर में भी कमी का दावा
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, भर्ती नवजातों में गंभीर स्थिति वाले कुछ बच्चों को बेहतर इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र रेफर किया गया. वहीं, बेहद गंभीर और कमजोर स्थिति वाले कुछ नवजातों को बचाया नहीं जा सका.
अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि 19 रेडियेंट वारमर, वेंटिलेटर और सी-पैप जैसी मशीनों की मदद से समय से पहले पैदा होने वाले बच्चों और गंभीर नवजातों की मृत्यु दर में पहले के मुकाबले कमी आयी है.
चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 540 नवजात भर्ती
सदर अस्पताल प्रबंधन से मिले आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्तीय वर्ष में भी नवजातों के इलाज का सिलसिला जारी है. 1 अप्रैल से 13 सितंबर तक कुल 540 नवजात शिशुओं को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया है.
एसएनसीयू में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों और विशेष रूप से प्रशिक्षित नर्सों की टीम चौबीसों घंटे इन नवजातों की निगरानी और देखभाल में जुटी हुई है.
ग्रामीण परिवारों के लिए बड़ा सहारा
निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से दूर सदर अस्पताल का एसएनसीयू ग्रामीण और आम परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन रहा है. यहां समय से पहले जन्मे बच्चों, कम वजन वाले नवजातों और जन्म के समय सांस लेने में परेशानी जैसी गंभीर स्थिति वाले बच्चों का अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से निःशुल्क इलाज किया जा रहा है.
सिविल सर्जन के निर्देश के बाद वार्ड की मॉनिटरिंग और दवाओं की उपलब्धता को भी पहले से अधिक सुदृढ़ किया गया है. अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, इससे नवजातों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है.
24 घंटे डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की मौजूदगी अनिवार्य
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने कहा कि एसएनसीयू वार्ड गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले परिवारों के लिए बड़ा संबल है. हर नवजात को सर्वोत्तम और समय पर इलाज उपलब्ध कराना प्राथमिकता है.
उन्होंने कहा कि 89 प्रतिशत सफलता दर स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत का नतीजा है, लेकिन नवजात मृत्यु दर को शून्य के करीब लाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. ड्यूटी रोस्टर के अनुसार चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की 24 घंटे मौजूदगी अनिवार्य की गयी है. किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
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