मधुबनी बिजली समस्या: लंबे समय से लो-वोल्टेज और बार-बार फ्यूज उड़ने की समस्या झेल रहे देवहार गांव के करीब 400 उपभोक्ताओं को अब राहत मिल गई है. विद्युत विभाग ने देवहार पंचायत के वार्ड 5 में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल कर दी है. यह कार्रवाई विद्युत कार्यपालक अभियंता की सख्ती और उपभोक्ता की शिकायत के बाद हुई है.
सहयोग पोर्टल पर शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
देवहार गांव निवासी शिवम कुमार झा ने बिजली की समस्या को लेकर सहयोग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत मिलने के बाद कनीय विद्युत अभियंता ने गांव पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया. जांच में लो-वोल्टेज की समस्या को गंभीर पाया गया.
बताया गया कि आरडीएसएस योजना के तहत गांव में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर लगाने के लिए डीएसएस समेत पूरा ढांचा पहले ही तैयार किया जा चुका था. इसके बावजूद ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं किया गया था.
ठेकेदार ने प्रोजेक्ट स्कोप पूरा होने का दिया हवाला
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित कार्य की कांट्रैक्टर एजेंसी जेके इलेक्ट्रिक कॉन्ट्रैक्टर एलएलपी ने दरभंगा सर्कल में अपना प्रोजेक्ट स्कोप पूरा होने का हवाला देते हुए ट्रांसफार्मर लगाने से इनकार कर दिया था.
इसके बाद मामला विभागीय स्तर पर आगे की योजना आने तक टलता रहा. इस बीच गांव के लोगों को लो-वोल्टेज और बार-बार फ्यूज उड़ने की परेशानी झेलनी पड़ रही थी.
कार्यपालक अभियंता की फटकार के बाद बदली स्थिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए झंझारपुर के विद्युत कार्यपालक अभियंता रंजन कुमार देव ने नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को शिकायत का तत्काल समाधान करने का निर्देश दिया. साथ ही मामले में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया.
कार्यपालक अभियंता की सख्ती के बाद विभाग ने कागजी प्रक्रिया और ठेकेदार के इनकार को दरकिनार करते हुए खुद कार्रवाई शुरू की. इसके बाद देवहार पंचायत के वार्ड 5 में नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर उसे चालू कराया गया.
400 उपभोक्ताओं को मिली राहत
नया ट्रांसफार्मर चालू होने के बाद देवहार गांव में बिजली आपूर्ति सुचारू हो गई है. इससे करीब 400 कंज्यूमर को राहत मिली है. लंबे समय से कम वोल्टेज और बार-बार फ्यूज उड़ने की समस्या से परेशान लोगों ने अब सामान्य बिजली आपूर्ति शुरू होने पर राहत जताई है.
इस मामले में खास बात यह रही कि शिकायत दर्ज होने के बाद स्थलीय जांच हुई और समस्या सामने आने के बावजूद कार्रवाई में देरी हुई. बाद में कार्यपालक अभियंता की सख्ती के बाद विभाग ने तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराया.
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