चमकी बुखार मधुबनी: नेपाल के तराई क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ के कारण सीमावर्ती मधुबनी जिले में महामारी का खतरा मंडराने लगा है. राज्य स्वास्थ्य समिति से प्राप्त दिशा-निर्देशों के बाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है. बाढ़ के बाद पैदा हुई पर्यावरणीय परिस्थितियों के चलते जिले में एक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस), चमकी बुखार और जापानी इन्सेफलाइटिस (जेई) के मामलों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका है. इसे देखते हुए पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर विशेष सतर्कता बरतने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.
अस्पतालों में जीवन रक्षक दवाओं और बेड की मुकम्मल व्यवस्था
सिविल सर्जन ने सीमावर्ती प्रभावित क्षेत्रों और सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर मस्तिष्क ज्वर के त्वरित इलाज के लिए पुख्ता मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करने का आदेश दिया है. अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और संसाधनों की उपलब्धता अनिवार्य की गई है:
- पर्याप्त मात्रा में आइवी फ्लुड्स और ऑक्सीजन सिलेंडर का बैकअप.
- दौरे रोकने वाली जरूरी दवाइयां और ओआरएस पैकेट का पर्याप्त बफर स्टॉक.
- मरीजों की आपात स्थिति के लिए सुरक्षित डेडिकेटेड बेड.
निःशुल्क 102 एम्बुलेंस सेवा रहेगी 24 घंटे मुस्तैद
संदिग्ध मरीजों को बिना किसी विलंब के नजदीकी अस्पताल व विशेष ट्रीटमेंट सेंटर पहुंचाने के लिए 102 एम्बुलेंस सेवा को 24 घंटे तैयार रहने को कहा गया है. एम्बुलेंस में देरी की आशंका पर स्थानीय स्तर पर वैकल्पिक वाहनों की व्यवस्था करने का निर्देश है. राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित परिवारों के बच्चों पर स्वास्थ्य कर्मी विशेष नजर रख रहे हैं. संदिग्ध मरीजों की तुरंत जांच कर उनके सैंपल आईडीएसपी पोर्टल पर तत्काल अपडेट किए जा रहे हैं.
मच्छरों के खात्मे के लिए चलेगा सघन अभियान
बाढ़ प्रभावित और जलजमाव वाले क्षेत्रों में मच्छरों के पनपने पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग युद्ध स्तर पर जुट गया है:
- जमे हुए पानी के सभी स्रोतों पर केरोसिन तेल और एंटी-लार्वा केमिकल का छिड़काव.
- संवेदनशील और चिन्हित गांवों में नियमित फॉगिंग और आईआरएस छिड़काव.
शत-प्रतिशत जेई टीकाकरण और विभागों में तालमेल
सदर अस्पताल से लेकर ग्रामीण स्तर तक बच्चों के जापानी इन्सेफलाइटिस टीकाकरण की सघन जांच शुरू की गई है. छूटे हुए बच्चों को विशेष अभियान चलाकर टीका दिया जा रहा है. आशा, एएनएम और सीएचओ घर-घर जाकर लोगों को जागरूक कर रही हैं. साथ ही स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, नगर निकाय, शिक्षा विभाग और जीविका दीदियों के संयुक्त समन्वय से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.
बोले सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने बताया कि नेपाल में आई बाढ़ के कारण मैदानी भागों में भारी जलजमाव हुआ है, जिससे मच्छरों का प्रकोप और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा है. विभाग पूरी तरह मुस्तैद है. उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों में तेज बुखार या चमकी के लक्षण दिखते ही तुरंत सरकारी अस्पताल से संपर्क करें.
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