देसी मछलियों के संरक्षण को नई उड़ान, मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना की शुरुआत
जाले. महाकवि कालिदास सूर्यदेव महाविद्यालय (एमकेएस कॉलेज) त्रिमुहान चंदौना के मुख्य द्वार पर लगे नेम प्लेट से उर्दू भाषा में महाविद्यालय का नाम हटाए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. उर्दू प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे बिहार की दूसरी राजकीय भाषा की उपेक्षा बताते हुए ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है.
देसी छोटी मछलियों के संरक्षण पर सरकार का है विशेष फोकसग्रामीण क्षेत्रों में पैदा होंगे रोजगार के नए अवसर
प्रतिनिधि, मधुबनीबिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए देसी छोटी मछली प्रजातियों के संरक्षण, संवर्धन और मत्स्य उत्पादन को नयी दिशा देने के उद्देश्य से मत्स्य प्रजाति विविधिकरण योजना की शुरुआत की है. इस योजना के माध्यम से विलुप्त की ओर बढ़ रही स्थानीय मछली प्रजातियों का संरक्षण करने के साथ-साथ मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा. कारण लंबे समय से विदेशी एवं सीमित प्रजातियों के पालन के कारण कई पारंपरिक देसी मछलियों की संख्या में लगातार कमी देखी जा रही थी. इसे ध्यान में रखते हुए विभाग ने देसी प्रजातियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक पालन को बढ़ावा देने की पहल शुरू की है. इसके तहत चयनित योजनाओं पर अनुदान भी दिया जाएगा.
किसानों को देसी प्रजाति का उपलब्ध कराया जाएगा बीजयोजना के तहत मत्स्य पालकों को देसी प्रजातियों के बीज उपलब्ध कराने, तकनीकी मार्गदर्शन देने तथा आधुनिक मत्स्य पालन पद्धतियों से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी. इससे जैव विविधता का संरक्षण होगा. तालाबों की पारिस्थितिकी बेहतर होगी और मत्स्य उत्पादन में भी संतुलित वृद्धि होगी.
बाजार में देसी छोटी मछली की है अच्छी मांगमानना है कि देसी मछलियों की बाजार में अच्छी मांग और बेहतर कीमत मिलने से मत्स्य पालकों की आय में भी वृद्धि होगी. साथ ही, स्थानीय जलाशयों में प्राकृतिक मत्स्य संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा. मत्स्य विभाग ने अधिक से अधिक मत्स्य पालकों से इस योजना का लाभ उठाने और देसी मछली प्रजातियों के संरक्षण अभियान में भागीदारी करने की अपील की है. आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थानीय मत्स्य जैव विविधता को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
सिर्फ ऑनलाइन होंगे आवेदनइस योजना के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे. इच्छुक किसान और मत्स्य पालक मत्स्य विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर पंजीकरण कर आवेदन कर सकते हैं. विभाग ने ऑफलाइन आवेदन की व्यवस्था नहीं रखी है, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे. योजना का लाभ लेने के लिए 31 अगस्त तक आवेदन करना होगा. निर्धारित समय सीमा के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे.
एक परिवार को मिलेगा एक ही योजना का लाभमत्स्य विभाग के अनुसार, किसी भी एक व्यक्ति या एक परिवार को इस योजना के तहत केवल एक ही अवयव (कंपोनेंट) का लाभ मिलेगा. इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पहुंचाना है.
क्या कहते हैं अधिकारीजिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने कहा कि विलुप्त होती देसी छोटी मछलियों का संरक्षण के लिए योजना की शुरूआत की गई है. इसके लिए उन्नत हैचरी तकनीक से तैयार गुणवत्तापूर्ण मछली बीज भी उपलब्ध कराए जाएंगे. मत्स्य पालक किसान समय रहते आवेदन करें. ताकि पात्र लाभार्थी योजना का लाभ उठा सके.
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