Malaria Testing Rules: मलेरिया की सटीक जांच और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम पदाधिकारी ने बड़ा कदम उठाया है. विभाग ने मलेरिया जांच प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से मधुबनी समेत सभी जिलों के जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं.
60% स्लाइड और 40% RDT से होगी मलेरिया की जांच
जारी निर्देश के अनुसार, अस्पतालों में आने वाले बुखार से पीड़ित मरीजों की मलेरिया जांच अब दो तरीकों से की जाएगी:
- स्लाइड जांच: कुल बुखार पीड़ितों में से 60 प्रतिशत मरीजों की जांच रक्त पट्ट (स्लाइड) के माध्यम से होगी.
- आरडीटी जांच: शेष 40 प्रतिशत मरीजों की जांच आरडीटी (RDT) किट के माध्यम से की जाएगी.
- उद्देश्य: इस व्यवस्था से मलेरिया की सटीक एवं गुणवत्तापूर्ण पहचान सुनिश्चित की जा सकेगी.
हर महीने क्रॉस-चेक के लिए भेजे जाएंगे सैंपल
अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ.नरेंद्र कुमार सिन्हा ने बताया कि प्रत्येक माह संग्रहित मलेरिया रक्त पट्टों का निर्धारित प्रतिशत अनिवार्य रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय (ROHFW) को प्रति-परीक्षण (क्रॉस-चेक) के लिए भेजना होगा:
- धनात्मक सैंपल: प्रत्येक माह संग्रहित कुल पॉजिटिव (धनात्मक) मलेरिया रक्त पट्टों का 50 प्रतिशत.
- ऋणात्मक सैंपल: कुल नेगेटिव (ऋणात्मक) रक्त पट्टों का 1.5 प्रतिशत.
- समयसीमा: यह सैंपल प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में भेजना अनिवार्य होगा.
प्रयोगशाला सेवाओं और अनुपालन पर विशेष जोर
राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी ने पाया कि अधिकांश जिलों द्वारा इस व्यवस्था का अपेक्षित अनुपालन नहीं किया जा रहा है, जिससे जांच की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है. इसलिए प्रयोगशाला प्रावैधिकी के कार्यों की नियमित समीक्षा के निर्देश दिए गए हैं. समयबद्ध क्रॉस-चेक व्यवस्था से राज्य में मलेरिया नियंत्रण एवं उन्मूलन अभियान को और अधिक मजबूती मिलेगी.
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