Bihar Shrimp Farming: कोसी और कमला नदी प्रभावित क्षेत्रों में मत्स्य पालन को नई दिशा देने के लिए सरकार ने मीठे पानी में झींगा (प्रॉन) मछली उत्पादन की योजना शुरू की है. फिलहाल इसे प्रायोगिक तौर पर लागू किया गया है, लेकिन सफलता मिलने पर इसका विस्तार पूरे क्षेत्र में किया जाएगा. इस योजना के तहत मत्स्य किसानों को सरकारी अनुदान के साथ मत्स्य बीज भी उपलब्ध कराया जाएगा.
31 अगस्त तक कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन
योजना का लाभ लेने के इच्छुक मत्स्य पालक 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक मत्स्य पालन के साथ अधिक लाभ देने वाली आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके.
अन्य मछलियों के साथ भी कर सकेंगे पालन
मीठे पानी में मुख्य रूप से मैक्रोब्रैकियम रोसेनबर्गी (Macrobrachium rosenbergii) प्रजाति की झींगा मछली का पालन किया जाएगा. इसे रेहू, कतला और मृगल जैसी पारंपरिक मछलियों के साथ मिश्रित रूप से भी पाला जा सकता है. इससे एक ही तालाब से किसानों को दोहरी आमदनी का अवसर मिलेगा.
चार से छह महीने में तैयार होगी फसल
मत्स्य विभाग के अनुसार झींगा मछली का उत्पादन चार से छह महीने में तैयार हो जाता है. इसकी बाजार में मांग लगातार बनी रहती है और कीमत सामान्य मछलियों की तुलना में दो से तीन गुना तक अधिक मिलती है. विभाग का दावा है कि आधुनिक तकनीक अपनाने पर उत्पादन क्षमता भी काफी बेहतर होगी.
स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद
झींगा मछली स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर मानी जाती है. इसमें उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, आयोडीन और कैल्शियम पर्याप्त मात्रा में होता है. यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, हड्डियों की मजबूती और थायराइड संबंधी समस्याओं से बचाव में भी मददगार मानी जाती है.
क्या बोले जिला मत्स्य पदाधिकारी
जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि मधुबनी में झींगा मछली पालन को बढ़ावा देने की पहल शुरू कर दी गई है. इसके साथ ही स्थानीय जलाशयों और तालाबों में देसी छोटी मछलियों के संरक्षण और संवर्धन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है. इससे मत्स्य पालकों की आय बढ़ेगी और लोगों को पौष्टिक मछलियां उपलब्ध होंगी.
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