दिमाग के किसी भी हिस्से में बन सकता है ब्रेन ट्यूमर, डॉक्टरों ने बताए शुरुआती लक्षण और बचाव

Madhubani News: विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस 2026 पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से ब्रेन ट्यूमर के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने की अपील की है. चिकित्सकों का कहना है कि समय पर जांच और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है.जानिए विस्तार से…

Madhubani News: वैश्विक स्तर पर पैर पसार रही न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और जानलेवा बीमारियों के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सोमवार, 8 जून 2026 को दुनिया भर में ‘विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस’ मनाया जा रहा है. इस विशेष दिन को मनाने का मुख्य मकसद आम जनता को इस बीमारी के प्रति सचेत करना, भ्रांतियों को दूर करना और समय पर इसके इलाज के लिए प्रेरित करना है.

दिमाग के किसी भी हिस्से में हो सकता है ब्रेन ट्यूमर

सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर असामान्य कोशिकाओं की वृद्धि है, जो मस्तिष्क के किसी भी हिस्से में विकसित हो सकता है. समय पर पहचान और इलाज नहीं होने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. इसलिए इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है.

ये हैं ब्रेन ट्यूमर के प्रमुख लक्षण

डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि लगातार सिरदर्द, उल्टी या मितली, अत्यधिक थकान, सुनने में परेशानी, नींद नहीं आना, याददाश्त कमजोर होना, धुंधला दिखाई देना, चलते समय लड़खड़ाना और मांसपेशियों में ऐंठन जैसे लक्षण ब्रेन ट्यूमर की ओर संकेत कर सकते हैं. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं और शराब का अधिक सेवन भी इस बीमारी का जोखिम बढ़ा सकता है.

दो प्रकार का होता है ब्रेन ट्यूमर

एनसीडीओ डॉ. एसएन झा ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—कैंसरयुक्त और कैंसर रहित. कैंसरयुक्त ट्यूमर इलाज के बाद दोबारा हो सकता है और शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है, जबकि कैंसर रहित ट्यूमर अपेक्षाकृत धीरे-धीरे बढ़ता है और इसके दोबारा होने की संभावना कम रहती है.

समय पर जांच और इलाज है जरूरी

डॉ. झा ने बताया कि आयोनाइजिंग रेडिएशन, पारिवारिक इतिहास, ल्यूकेमिया, एचआईवी और बचपन में कैंसर जैसी स्थितियां ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ा सकती हैं. जांच के लिए एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है. मरीज की स्थिति के अनुसार सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी और कीमोथेरेपी के जरिए इलाज किया जाता है. उन्होंने कहा कि अधिकांश ब्रेन ट्यूमर वंशानुगत नहीं होते, लेकिन लक्षण दिखने पर तुरंत जांच और इलाज कराना जरूरी है.

मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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