Madhubani News: बिहार राज्य के सरकारी विद्यालयों में बहुप्रतीक्षित 1 जून से ग्रीष्मकालीन अवकाश (गर्मी की छुट्टी) की घोषणा होने के बाद भी शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों द्वारा शिक्षकों को एससीईआरटी (SCERT) के विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजने के तुगलकी आदेश पर विवाद खड़ा हो गया है. 1 जून से 5 जून तक आयोजित इस अनिवार्य ट्रेनिंग को लेकर मधुबनी जिले सहित पूरे राज्य के शिक्षकों में गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है. शिक्षक नेताओं ने इसे शिक्षकों की मानसिक प्रताड़ना और उनके मौलिक अधिकारों का हनन करार दिया है.
महिला शिक्षकों को 150 किमी दूर भेजा
इस तानाशाही आदेश पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रखर शिक्षक नेता ब्रह्मदेव यादव ने कहा कि शिक्षा विभाग के इस अप्रत्याशित फैसले से शिक्षकों में खौफ और दहशत का माहौल है. विभाग कब क्या नया फरमान निकाल दे, यह कहना मुश्किल हो गया है. उन्होंने कहा कि गर्मी की छुट्टियों को लेकर शिक्षकों ने काफी पहले से अपने बच्चों के साथ घूमने, पैतृक गांव जाने और विभिन्न धार्मिक व पारिवारिक यात्राओं की पूरी तैयारी कर रखी थी, लेकिन अचानक हजारों शिक्षकों को मात्र एक दिन पहले ट्रेनिंग में शामिल होने का आदेश निकालकर विभाग ने सबको अचंभित कर दिया. इसके कारण हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों के अरमानों पर पानी फिर गया है.
शिक्षक नेता ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि:
- अव्यवहारिक टाइमिंग: प्रशिक्षण में शामिल होने के लिए शिक्षकों को महज 12 घंटे पहले उनके मोबाइल पर मैसेज भेजकर जानकारी दी गई, जिससे अफरा-तफरी मच गई.
- महिलाओं को प्रताड़ना: जिले की महिला शिक्षकों की व्यावहारिक दिक्कतों को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए उन्हें उनके गृह क्षेत्र से 150 किलोमीटर दूर, तीन से चार जिला पार कर ट्रेनिंग सेंटर पर रिपोर्ट करने का आदेश दिया गया है.
जनगणना के बाद अब छुट्टी में ट्रेनिंग
ब्रह्मदेव यादव ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ दिन पहले शिक्षकों से स्कूल के समय के बाद जनगणना का कार्य लिया गया और अब गर्मी की छुट्टी में भी उन्हें चैन से नहीं रहने दिया जा रहा है. शिक्षा विभाग के अधिकारी और सरकार मिलकर जानबूझकर शिक्षक समाज को तबाह और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं. शिक्षक राष्ट्र और समाज के निर्माता हैं; उन्हें इस तरह सरेआम परेशान करने से न केवल शिक्षक समुदाय बल्कि आम जनता के बीच भी सरकार और प्रशासन के प्रति एक बेहद प्रतिकूल और नकारात्मक संदेश जा रहा है.
इस विरोध और आक्रोश की लहर में जिले के कई वरिष्ठ बुद्धिजीवी और शिक्षाविद भी खुलकर शिक्षकों के समर्थन में उतर आए हैं. कार्यक्रम में मौजूद अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक अर्जुन मिश्र, अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापक अरविंद लाल और प्रो. गंगाधर कामत आदि ने संयुक्त रूप से इस आदेश की कड़े शब्दों में निंदा की.
मधुबनी से केके पुट्टी की रिपोर्ट
