Madhubani News: मधुबनी जिले से मानवता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने समाज के गिरते मूल्यों के बीच उम्मीद की नई किरण जगा दी है.बेनीपट्टी प्रखंड के अरेर थाना अंतर्गत मधवापट्टी गांव में झाड़ियों से बरामद एक नवजात बच्ची को एक एक परिवार ने अपनाकर न केवल उसे नई जिंदगी दी, बल्कि इंसानियत की अनूठी मिसाल भी कायम की है.
मासूम की किलकारी ने रोक दिए कदम
जानकारी हो की सोमवार को मधवापट्टी निवासी मो. अनीश की पुत्री नदी किनारे से गुजर रही थी. इसी दौरान पास की झाड़ियों से आ रही किसी मासूम की किलकारी ने उसके कदम रोक दिए. वह स्वतः ही आवाज की दिशा में मुड़ी और झाड़ियों के करीब पहुंची. वहां का नजारा देख वह दंग रह गई.कपड़ों में लिपटी एक नवजात बच्ची वहां पड़ी थी, जिसे समाज के किसी निर्दयी व्यक्ति ने लावारिस छोड़ दिया था. बच्ची को जीवन-मौत से जूझता देख अनीश की पुत्री उसे तुरंत अपने घर ले आई.
ममता का आंचल और फातिमा की पहचान
जैसे ही बच्ची अनीश के घर पहुंची, उसे ममता का आंचल नसीब हुआ. मो. अनीश, जो पहले से तीन बेटों और एक बेटी के पिता हैं, उन्होंने इस बच्ची को अपनी दूसरी बेटी के रूप में पूरे हक के साथ अपना लिया. उन्होंने तुरंत बच्ची का स्वास्थ्य परीक्षण कराया और उसे ‘फातिमा’ नाम दिया. बच्ची के मिलने की खबर गांव में आग की तरह फैल गई और उसे देखने व गोद लेने के इच्छुक लोगों की भीड़उमड़पड़ी. लेकिन अनीश ने दृढ़तापूर्वक कहा कि अब यह उनकी अपनी बेटी है.
नम आंखों से विदाई
हालांकि, यह खुशी लंबे समय तक नहीं टिक सकी. सूचना मिलने के बाद चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की टीम कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए मधवापट्टीपहुंची. कानूनी प्रावधानों के तहत टीम ने बच्ची को फिलहाल सरकारी संरक्षण में ले लिया. जिस समय प्रशासन की टीम बच्ची को ले जा रही थी, अनीश के परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं. कुछ घंटों पहले जो घर खुशियों से भरा था, वहां एक बार फिर मायूसी छा गई.
मधुबनी बेनीपट्टी से धनंजय कुमार धीरज की रिपोर्ट
