मधुबनी से डॉ शैलेन्द्र कुमार झा की रिपोर्ट
Madhubani News: भीषण गर्मी और गिरते भूजल स्तर ने मधुबनी जिले के सदर प्रखंड रहिका में पेयजल की स्थिति को भयावह बना दिया है. क्षेत्र के अधिकांश चापाकल सूख चुके हैं, वहीं ‘नल-जल योजना’ की इकाइयां खराब होने से करीब 10 हजार की आबादी के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है. लोग बूंद-बूंद पानी के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं.
सफेद हाथी साबित हो रही ग्रामीण जलापूर्ति योजना
पीएचईडी विभाग द्वारा रहिका प्रखंड कार्यालय के समीप करोड़ों की लागत से बनाई गई जलमीनार आज महज ‘शोभा की वस्तु’ बनकर रह गई है. एक करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य 5,000 लोगों तक पानी पहुंचाना था. लेकिन, जमीन के अंदर बिछाई गई पाइपलाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों के घरों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है.
डार्क जोन की ओर बढ़ता भूजल स्तर
स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश की कमी और जलस्तर नीचे जाने से चापाकल जवाब दे चुके हैं. पाइपलाइन की मरम्मत न होने से स्थिति विस्फोटक होती जा रही है. जल संकट ने न सिर्फ रहिका बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले लिया है.
बीडीओ ने पीएचईडी को लिखा पत्र
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) ने कहा है कि पेयजल संकट को दूर करने के लिए पीएचईडी विभाग को पत्र लिखा गया है. पाइपलाइन को जल्द से जल्द दुरुस्त करने का निर्देश दिया गया है ताकि आपूर्ति बहाल की जा सके. हालांकि, जब तक धरातल पर काम शुरू नहीं होता, लोगों को राहत मिलने की उम्मीद कम ही नजर आ रही है.
