मधुबनी: समाहरणालय परिसर में शुक्रवार को बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने और आक्रोशपूर्ण प्रदर्शन की स्थिति बनने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. प्रशासन के अनुसार, कुछ साइबर कैफे संचालकों और कथित दलालों की ओर से भूमिहीन लोगों को जमीन दिये जाने संबंधी सूचना प्रसारित की गयी थी. इसके बाद बड़ी संख्या में महिलाएं साइबर कैफे पहुंचीं और ऑनलाइन जनता दरबार में जिला पदाधिकारी से मिलने के लिए आवेदन कर उसकी रिसीविंग लेकर समाहरणालय पहुंच गयीं.
महिलाओं की भीड़ के कारण समाहरणालय परिसर के साथ आसपास के इलाके में विधि-व्यवस्था और जाम की स्थिति उत्पन्न हो गयी.
आठ साइबर कैफे संचालकों को SDO के समक्ष किया गया प्रस्तुत
मामले की जानकारी मिलने के बाद एसडीओ सदर चंदन कुमार झा के निर्देश पर नगर थाना पुलिस ने कार्रवाई की. पुलिस ने आठ साइबर कैफे संचालकों को अनुमंडल पदाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया.
एसडीओ ने सभी संचालकों को कड़ी हिदायत देते हुए भविष्य में इस तरह की भ्रामक सूचना या अफवाह फैलाकर लोगों को गुमराह नहीं करने की चेतावनी दी.
BNS की धारा 126 के तहत भरवाया गया बॉन्ड
एसडीओ सदर ने बताया कि गलत सूचना के कारण बड़ी संख्या में लोगों के एकत्रित होने से विधि-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई. इसे देखते हुए संबंधित सभी साइबर कैफे संचालकों से भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 126 के तहत बॉन्ड भरवाया गया.
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि बिना सत्यापन किसी सरकारी योजना या भूमिहीनों को जमीन उपलब्ध कराने संबंधी सूचना का प्रचार-प्रसार करने से लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
बॉन्ड भरने वाले साइबर कैफे संचालकों में अभिषेक शर्मा, शंभू कुमार, आभास कुमार, संजीव कुमार, विकास कुमार, आकाश कृष्ण, प्रदीप कुमार और विपिन यादव शामिल हैं.
सरकारी योजना की जानकारी पहले करें सत्यापित
एसडीओ सदर ने लोगों से अपील की कि किसी भी सरकारी योजना या जमीन से संबंधित सूचना पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक स्तर पर पुष्टि करें.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, साइबर कैफे या अन्य माध्यमों से प्रसारित अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर बड़ी संख्या में सरकारी कार्यालयों में पहुंचने से विधि-व्यवस्था प्रभावित होती है और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
