Madhubani News: केंद्र और राज्य सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की कवायद तेज हो गई है. आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन (एबीडीएम) के तहत मधुबनी जिले के सभी निजी स्वास्थ्य संस्थानों, फार्मेसी, क्लिनिक, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर) में पंजीयन अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का हेल्थकेयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर) कराना भी जरूरी है.
सरकारी संस्थानों का काम शत-प्रतिशत पूरा, निजी पर जोर
एबीडीएम के परियोजना समन्वयक जय शंकर ने बताया कि जिले के सभी 647 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का एचएफआर कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है. इसमें सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल, पीएचसी और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर शामिल हैं. अब निजी क्षेत्र को इससे जोड़ने पर पूरा जोर है. जिले की 626 पंजीकृत फार्मेसी में से 382, क्लिनिक की 501 इकाइयों में से 17 और 138 डायग्नोस्टिक लैब में से 12 का पंजीयन अब तक पूरा हो चुका है, जिसे तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य है.
ऑनलाइन पंजीयन की सुविधा, ये दस्तावेज हैं जरूरी
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि सभी निजी संस्थान संचालक और औषधि विक्रेता विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर स्वयं भी ऑनलाइन पंजीयन कर सकते हैं. इस प्रक्रिया के लिए आधार कार्ड, ईमेल आईडी, संस्थान का निबंधन प्रमाण पत्र (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) और औषधालय या क्लिनिक की एक लाइव फोटो अपलोड करना अनिवार्य किया गया है.
पारदर्शी मिलेंगी सेवाएं, डेटा प्रबंधन होगा आसान
इस डिजिटल मुहिम से सभी स्वास्थ्य संस्थानों की एक अनूठी डिजिटल पहचान सुनिश्चित होगी. सिविल सर्जन के मुताबिक, इससे मरीजों को ज्यादा पारदर्शी और बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी. वहीं दूसरी ओर, सरकार को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों की प्रभावी मॉनिटरिंग करने और स्वास्थ्य डेटा का सुरक्षित प्रबंधन करने में बड़ी सहूलियत मिलेगी.
मधुबनी से अनिल कुमार झा की रिपोर्ट
