Madhubani News: मधुबनी. जिले में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने और गंभीर नवजातों को जन्म स्थान के आसपास ही बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिले के 9 चयनित रेफरल स्वास्थ्य केंद्रों में नवजात स्थिरीकरण इकाई (NBSU) स्थापित कर उसे पूरी तरह फंक्शनल करने की कवायद चल रही है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के निर्देश पर वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत इन स्वास्थ्य संस्थानों में इकाइयों का क्रियान्वयन किया जा रहा है.
9 स्वास्थ्य केंद्रों में शुरू होगी नवजात स्थिरीकरण इकाई
चयनित रेफरल अस्पतालों, अनुमंडलीय अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में NBSU को जल्द शुरू करने की तैयारी है. इन इकाइयों के सक्रिय होने से गंभीर, कम वजन और समय से पहले जन्मे नवजातों को प्रारंभिक आपातकालीन उपचार स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेगा.
अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होंगी NBSU
प्रत्येक चयनित केंद्र को नवजातों के उपचार के लिए जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं. इनमें शामिल हैं:
- नवजातों का तापमान नियंत्रित रखने के लिए 3 रेडिएंट वार्मर
- पीलिया के उपचार के लिए 3 फोटोथेरेपी यूनिट
- श्वसन नली को साफ करने के लिए 1 सक्शन मशीन
- नवजातों की जांच एवं उपचार के लिए 1 स्पॉट लाइट
इन उपकरणों की मदद से नवजातों को शुरुआती स्तर पर आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
21 अगस्त तक मांगी गई NBSU की रिपोर्ट
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने सभी संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को NBSU जल्द फंक्शनल करने का निर्देश दिया है. अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उपकरण सही तरीके से स्थापित हों और आवश्यक स्टाफ की तैनाती भी पूरी हो.
सभी संबंधित प्रभारियों को NBSU फंक्शनल स्टेटस फार्मेट भरकर 21 अगस्त तक शिशु स्वास्थ्य कोषांग के आधिकारिक ई-मेल पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है.
लापरवाही पर होगी सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने या NBSU को फंक्शनल करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य विभाग ने इसे नवजात स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ा प्राथमिकता वाला कार्य बताया है.
रेफरल के मामलों में आएगी कमी
NBSU के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद नवजातों में पीलिया, सांस लेने में परेशानी, कम वजन और अन्य गंभीर समस्याओं का शुरुआती उपचार स्थानीय स्तर पर किया जा सकेगा. इससे गंभीर स्थिति में बच्चों को जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज रेफर करने की जरूरत कम होने की उम्मीद है.
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