चर्चित उगन हत्याकांड: 36 महीने बाद पीड़ित परिवार को मिला न्याय, कोर्ट ने आरोपी को सुनाई उम्रकैद की सजा

सकरी के उगन हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला आया है. आरोपी कमलेश कुमार दास को हत्या, षडयंत्र और साक्ष्य मिटाने के मामले में अलग-अलग सजा सुनाई गई. फैसला सुनते ही मृतक के परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े.

मधुबनी उगन हत्याकांड: सकरी थाना क्षेत्र के चर्चित उगन हत्याकांड में करीब तीन साल बाद अदालत ने दोषी कमलेश कुमार दास को उम्रकैद की सजा सुनाई है. जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय उमेश कुमार पांडेय की अदालत ने गुरुवार को सजा के बिंदु पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया. अदालत ने दोषी पर कुल एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे न देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.

विभिन्न धाराओं के तहत सजा का ऐलान

अदालत ने सकरी थाना क्षेत्र के शिवोतर दास टोल निवासी कमलेश कुमार दास को भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना न देने पर छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी. इसके अलावा धारा 120बी के तहत भी आजीवन कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई है, जबकि धारा 201 के तहत पांच वर्ष के कारावास के साथ 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है.

अभियोजन पक्ष ने मांगी थी कड़े दंड की सजा

सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक फैज अहमद ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा. सूचक की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार राय रंजन और कैलाश कुमार साह ने बहस की. अभियोजन पक्ष ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा की मांग की, जबकि बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता शिवकुमार ठाकुर ने कम से कम सजा देने की अपील की थी.

तीन साल पहले पोखर किनारे मिला था शव

अभियोजन के अनुसार, घटना 12 मार्च 2023 की है. सूचक गनौर दास का पुत्र उगन कुमार आरोपी और उसके साथियों के साथ घर से निकला था. देर रात तक वापस न लौटने पर परिजनों ने तलाश शुरू की, लेकिन उसका मोबाइल फोन बंद मिला. अगले दिन उगन का शव शिवोतर दास टोला के पास पोखर किनारे जलकुंभी से ढका मिला. शरीर पर चाकू के निशान थे. इसके बाद मृतक के पिता गनौर दास ने सकरी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी.

फैसला सुनते ही छलक पड़े परिजनों के आंसू

सजा सुनाए जाने के समय मृतक उगन के पिता गनौर दास अपनी पत्नी सरस्वती देवी और परिजनों के साथ कोर्ट में मौजूद थे. फैसला सुनते ही परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े. गनौर दास ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और अदालत से उन्हें न्याय मिला है.

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By Ajay anand

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