Madhubani News: जिले में हाइपोग्लाइसीमिया (रक्त में शर्करा का स्तर अत्यधिक कम होना) के 24 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है. राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण के निर्देश के आलोक में सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), अनुमंडलीय अस्पताल (एसडीएच) और सदर अस्पताल को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं.
एईएस प्रोटोकॉल के अनुसार होगा इलाज
राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के निर्देश के तहत सभी चिकित्सा पदाधिकारियों को हाइपोग्लाइसीमिया के संदिग्ध और पुष्टि मामलों का उपचार एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और मस्तिष्क ज्वर की उपचार मार्गदर्शिका के अनुसार करने का निर्देश दिया गया है.
स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों की समय पर पहचान, त्वरित जांच और तत्काल उपचार सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है, ताकि गंभीर स्थिति से बचा जा सके.
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क्या है हाइपोग्लाइसीमिया?
हाइपोग्लाइसीमिया ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से काफी कम, सामान्यतः 70 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (mg/dL) से नीचे पहुंच जाता है. यह स्थिति प्रायः मधुमेह के मरीजों में इंसुलिन या अन्य दवाओं के अधिक उपयोग, लंबे समय तक भोजन नहीं करने या अत्यधिक शारीरिक श्रम के कारण हो सकती है.
इसके प्रमुख लक्षणों में अत्यधिक पसीना आना, कंपकंपी, तेज भूख लगना, चक्कर आना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, भ्रम की स्थिति और दिल की धड़कन तेज होना शामिल हैं.
ब्लड शुगर कम होने पर क्या करें?
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि ब्लड शुगर कम होने पर '15-15 नियम' अपनाया जा सकता है. इसके तहत मरीज को 15 ग्राम तेजी से असर करने वाले कार्बोहाइड्रेट जैसे आधा कप फलों का रस, आधा कैन सादा शीतल पेय या एक बड़ा चम्मच चीनी अथवा शहद दिया जाए. इसके 15 मिनट बाद दोबारा ब्लड शुगर की जांच की जाए. यदि शुगर का स्तर अभी भी 70 mg/dL से कम हो, तो यही प्रक्रिया दोहराई जाए.
गंभीर स्थिति में यदि मरीज बेहोश हो जाए, दौरे पड़ें या कोमा की स्थिति हो, तो तत्काल अस्पताल ले जाकर चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है.
ग्लूकोज, ओआरएस और दवाओं का पर्याप्त भंडारण रखने के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को ग्लूकोज, ओआरएस, आवश्यक दवाओं और अन्य जीवनरक्षक सामग्रियों का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. साथ ही आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बिना किसी विलंब के उपचार उपलब्ध कराने की तैयारी रखने को कहा गया है.
आशा कार्यकर्ता चलाएंगी जागरूकता अभियान
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया है. उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कोई भी बच्चा रात में खाली पेट न सोए. साथ ही बच्चों को समय पर पौष्टिक भोजन देने और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की सलाह दी जाएगी.
