मछुआरा बीमा कवर: मधुबनी जिले में मत्स्य पालन से जुड़े लोगों के लिए राहत की खबर है. सरकार ने मछुआरों और मछली पालकों को दुर्घटना से आर्थिक सुरक्षा देने के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना (GAIS) शुरू की है. योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता की स्थिति में 5 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा. खास बात यह है कि इसके लिए लाभार्थियों को कोई प्रीमियम नहीं देना होगा.
दुर्घटना में मौत पर 5 लाख रुपये तक की सहायता
योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता होने पर 5 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी. स्थायी आंशिक विकलांगता की स्थिति में 2.5 लाख रुपये और दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर 25 हजार रुपये तक के चिकित्सा खर्च का प्रावधान है. सरकार बीमा प्रीमियम की पूरी राशि वहन करेगी.
18 से 70 वर्ष तक के मछुआरे पात्र
इस योजना के लिए 18 से 70 वर्ष आयु वर्ग के पात्र मछुआरों को बीमा कवरेज दिया जाना है. इसके अलावा मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीक, मत्स्य पालन प्रबंधन और व्यवसाय विस्तार से संबंधित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा. इससे मछुआरों को आर्थिक सुरक्षा के साथ अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
NFDP पोर्टल से करा सकते हैं निबंधन
योजना का लाभ लेने के लिए इच्छुक मछुआरों और मछली पालकों को पहले अपना निबंधन कराना होगा. इसके लिए संबंधित जिला मत्स्य कार्यालय या नेशनल फिशरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म (NFDP) के माध्यम से आवेदन किया जा सकता है. ऑनलाइन आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक की प्रति और मत्स्य पालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे.
पंडौल में चलाया गया पंजीकरण अभियान
योजना को लेकर पंडौल प्रखंड में मत्स्य सहयोग समिति के सदस्यों के बीच पंजीकरण अभियान चलाया गया. इसमें समूह दुर्घटना बीमा योजना, NFDP पंजीकरण, मत्स्य किसान क्रेडिट कार्ड और प्रशिक्षण के लिए आवेदन कराये गये. मत्स्य विकास पदाधिकारी प्रवीण कुमार और बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के कोऑर्डिनेटर विवेक प्रियदर्शी ने मछली श्रमिकों और प्रगतिशील मछली पालकों का पंजीकरण किया.
जांच के बाद मिलेगा योजना का लाभ
जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार ने बताया कि आवेदन मिलने के बाद दस्तावेजों की जांच की जाएगी. संबंधित अधिकारी जरूरत के अनुसार मछली पालक के तालाब और कार्यस्थल का निरीक्षण भी करेंगे. पात्रता की पुष्टि और सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थी को योजना का लाभ दिया जाएगा. विभाग का कहना है कि इससे मछुआरों को सुरक्षा देने के साथ जिले में मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिलेगा.
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