Madhubani News: मधुबनी. बिहार के स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को निर्बाध ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ऑक्सीजन प्लांटों को हाईटेक बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. केंद्र सरकार के निर्देश पर राज्य स्वास्थ्य समिति की ओर से पीएम केयर्स के तहत स्थापित पीएसए ऑक्सीजन जनरेशन प्लांटों में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) डिवाइस लगाए जा रहे हैं. पहले चरण में सक्रिय प्लांटों को इस तकनीक से जोड़ा जा रहा है, जिससे ऑक्सीजन उत्पादन और आपूर्ति की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग दिल्ली और पटना से की जा सकेगी.
अब ऑक्सीजन प्लांट की होगी लाइव निगरानी
सिविल सर्जन डॉ. हरेंद्र कुमार ने बताया कि IoT डिवाइस लगने के बाद ऑक्सीजन प्लांट की कार्यप्रणाली, ऑक्सीजन की शुद्धता और दबाव की लाइव निगरानी संभव होगी. पहले किसी तकनीकी खराबी या प्रेशर कम होने की जानकारी सप्लाई प्रभावित होने के बाद मिलती थी. अब सिस्टम में गड़बड़ी होते ही संबंधित अधिकारियों और वेंडर टीम को तत्काल अलर्ट मिल जाएगा.
पांच अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट की व्यवस्था
जिले के पांच महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए गए हैं. सदर अस्पताल एवं अनुमंडलीय अस्पताल जयनगर में पीएम केयर्स के तहत ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं. वहीं अनुमंडलीय अस्पताल फुलपरास में डॉ. फार यू, अनुमंडलीय अस्पताल झंझारपुर में मिथिला सहकारी दुग्ध उत्पादन समिति तथा अररिया संग्राम स्थित ट्रामा सेंटर में मेघा इंटरप्राइजेज की ओर से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया गया है.
सदर अस्पताल का प्लांट सबसे अधिक क्षमता वाला
सदर अस्पताल में पीएम केयर्स के तहत 1000 एलपीएम क्षमता वाला पीएसए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित है. यह जिले के प्रमुख ऑक्सीजन प्लांटों में सबसे अधिक क्षमता वाला बताया गया है. इससे मुख्य आपातकालीन वार्ड और आईसीयू को ऑक्सीजन आपूर्ति की जा सकती है.
हालांकि, तकनीशियन की पदस्थापना नहीं होने के कारण यह प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा है. IoT आधारित निगरानी व्यवस्था लागू होने के साथ प्लांटों के संचालन और तकनीकी स्थिति पर बेहतर नजर रखने की उम्मीद है.
अस्पताल प्रबंधकों को बनाया गया नोडल अधिकारी
सिविल सर्जन ने जिले के सभी पांच संबंधित अस्पतालों के प्रबंधकों को नोडल अधिकारी नामित किया है. उन्हें IoT डिवाइस लगाने वाली तकनीकी टीम को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर इंस्टॉलेशन का कार्य पूरा हो सके.
HITES एजेंसी की देखरेख में होगा काम
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशानुसार पूरे प्रोजेक्ट को डिजास्टर मैनेजमेंट की देखरेख में HITES एजेंसी के माध्यम से पूरा कराया जा रहा है. इसके सुचारू संचालन के लिए एम्स पटना, एम्स गुवाहाटी और NIHFW नई दिल्ली में राज्य के डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है.
तकनीकी सहायता के लिए भारत सरकार की ओर से प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर प्रतीक रॉय को अधिकृत किया गया है.
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