Madhubani News: ऑपरेशन सिंदूर के अनुभव और अग्निवीरों के पहले बैच की सेवा अवधि पूरी होने से पहले अग्निपथ योजना की व्यापक समीक्षा की जा रही है. इसी विषय पर पूर्व एयर फोर्स अधिकारी एवं अल्ट्रा स्कील्ड तथा बेस्ट इंस्ट्रक्टर अवार्ड से सम्मानित आशीष झा ने कहा कि नए सीडीएस के कार्यभार संभालने के बाद अग्निपथ-2 की रूपरेखा पर मंथन चल रहा है.
रिटेंशन बढ़ाने पर हो रहा विचार
आशीष झा ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चार वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को स्थायी कैडर में शामिल किया जाता है. पूर्व सैन्य अधिकारियों का एक वर्ग इसे बढ़ाकर 50 से 75 प्रतिशत तक करने का पक्षधर है. उनका कहना है कि चार वर्षों में प्रशिक्षित जवानों का बड़ा हिस्सा सेवा से बाहर करना संसाधनों और कौशल, दोनों के लिहाज से उचित नहीं है.
आधुनिक युद्ध के अनुरूप बदलेगा प्रशिक्षण
उन्होंने कहा कि ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, साइबर ऑपरेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित युद्ध जैसी नई चुनौतियों को देखते हुए प्रशिक्षण मॉड्यूल में बदलाव पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
अलग-अलग सैन्य शाखाओं के लिए अलग मॉडल
आशीष झा के अनुसार इन्फैंट्री और एयर डिफेंस जैसी शाखाओं के लिए अलग सेवा मॉडल तथा साइबर और ड्रोन विशेषज्ञों के लिए अपेक्षाकृत लंबी सेवा अवधि का प्रस्ताव भी चर्चा में है. उनका मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर में अग्निवीरों का प्रदर्शन बेहतर रहा और आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित जवानों का प्रभावी उपयोग तभी संभव है, जब उन्हें कम से कम छह से आठ वर्ष तक सेवा का अवसर मिले.
पूर्व अग्निवीरों को रोजगार में प्राथमिकता की मांग
उन्होंने कहा कि पूर्व अग्निवीरों को एसएससी जीडी में लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने पर 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलता है. इसके अलावा भारतीय रेलवे, कोस्ट गार्ड, दिल्ली पुलिस और विभिन्न अर्धसैनिक बलों में भी उन्हें प्राथमिकता दी जाती है. हालांकि उन्होंने कहा कि बिहार में सेवानिवृत्त सैनिकों और पूर्व अग्निवीरों के लिए ऐसी प्राथमिकता या आरक्षण व्यवस्था नहीं है, जबकि कई अन्य राज्यों में इसका प्रावधान किया गया है.
