Madhubani News: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक कृषि ऋण की पहुंच बढ़ाने को लेकर सोमवार देर शाम समाहरणालय सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई. उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सुमन प्रसाद साह की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिले के सभी बैंक प्रतिनिधियों, जिला समन्वयकों और संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया. समीक्षा के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) आवेदनों के निपटारे की धीमी गति पर डीडीसी ने नाराजगी जताई और बैंकों को समयबद्ध कार्रवाई का निर्देश दिया.
मधुबनी भी योजना के लिए चयनित जिला
डीडीसी ने बताया कि प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत देश के 100 और बिहार के सात जिलों का चयन कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कम कृषि ऋण जैसे मानकों के आधार पर किया गया है. मधुबनी भी इस महत्वाकांक्षी योजना में शामिल है. उन्होंने कहा कि योजना की नियमित समीक्षा उच्च स्तर पर हो रही है, इसलिए बैंक और कृषि विभाग बेहतर समन्वय के साथ काम करें.
1,088 आवेदन पहुंचे, सिर्फ 117 का हुआ निपटारा
बैठक में बताया गया कि कृषि विभाग की ओर से अब तक 1,088 किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) आवेदन बैंकों को भेजे गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 117 आवेदनों का ही निष्पादन किया गया है. इस पर डीडीसी ने असंतोष व्यक्त करते हुए सभी बैंकों को लंबित आवेदनों का प्राथमिकता के आधार पर जल्द निपटारा करने का निर्देश दिया.
केसीसी के लिए ये दस्तावेज जरूरी
बैंक अधिकारियों ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आधार कार्ड, आवेदक के नाम से अद्यतन लगान रसीद या भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र तथा पैन कार्ड अनिवार्य हैं. डीडीसी ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र किसानों की पहचान कर आवेदन प्रक्रिया में हरसंभव सहयोग करें.
नाबार्ड ने जारी की ऋण संभाव्यता योजना
बैठक के दौरान नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की संभाव्यता युक्त ऋण योजना का विमोचन किया. उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 में जिले के बैंकों ने कृषि क्षेत्र में लक्ष्य का 43.45 प्रतिशत, एमएसएमई क्षेत्र में 44.19 प्रतिशत और अन्य प्राथमिक क्षेत्रों में 13.59 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की.
शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश
डीडीसी सुमन प्रसाद साह ने सभी बैंकों को वर्ष 2026-27 में निर्धारित लक्ष्यों की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होगी और जिले के कृषि विकास को नई गति मिलेगी.
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