43 दिनों से सऊदी में रखा है खजौली के शंभू का शव

सड़क दुर्घटना में हो गयी थी मौत अस्पताल में रखा गया है शव मधुबनी : एक साल पहले जिस परिवार ने अपने घर के चिराग को लाख दुआ देकर सउदी कमाने के लिये भेजा था. वह दुआ बेजा गयी. घर का चिराग भी बुझ गया और आज परिवार अपने उस चिराग के अंतिम मुंह तक […]

सड़क दुर्घटना में हो गयी थी मौत अस्पताल में रखा गया है शव

मधुबनी : एक साल पहले जिस परिवार ने अपने घर के चिराग को लाख दुआ देकर सउदी कमाने के लिये भेजा था. वह दुआ बेजा गयी. घर का चिराग भी बुझ गया और आज परिवार अपने उस चिराग के अंतिम मुंह तक देखने को तरस रहे हैं. बाप की थकी हुई आखें अपने बेटे के आने का रहा निहार रही है तो बूढ़ी मां की आंचल भी अपने कलेजे के टुकड़े को देखने को बेताब है. वहीं पत्नी और छोटे छोटे तीन बच्चे भी हर दिन रोते हुए अपना जीवन बिता रहा है. बीते 43 दिनों से खजौली प्रखंड के कन्हौली मल्लिक टोल निवासी शंभू कुमार सहनी का शव सउदी के समताह जेनरल अस्पताल में रखा है और
परिजन को शंभू का शव नहीं मिल रहा. एक – एक पल परिवार वालों के ऊपर भारी गुजर रहा है. सुबह रोते हुए आंखें खुलती है तो रात को भी रोते हुए ही सोते हैं. यह सिलसिला बीते 43 दिनों से चल रही है. शंभू की सउदी में बीते 29 दिसंबर 2016 को सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी. शंभू की शादी शुदा है और इसके तीन बच्चे भी है. पत्नी बच्ची देवी बताती है कि एक साल से पति के आने का इंतजार कर रही थी. होली में आने की बात शंभू ने कहा था. पर उसके आने की बात तो दूर अब तो उनके शव भी मिल जायें तो लोगों की मेहरबानी होगी.
प्रशासन से जनप्रतिनिधि तक से लगा चुके गुहार : परिजन शव को वापस लाने के लिये हर स्तर पर पहल कर थक चुके हैं. जिला प्रशासन से लेकर प्रतिनिधियों को भी अपनी पीड़ा बता चुके हैं. विधान पार्षद सुमन कुमार महासेठ बताते हैं कि इस मामले को लेकर उन्हें परिजनों ने बताया था. वे सरकार से शंभू के शव को लाने के लिये पहल करने की मांग कर चुके हैं. इसको लेकर कई बार सार्थक काम किया गया. पर बीच में वे निजी काम से व्यस्त हो गये और परिजनों ने भी खोज नहीं किया. अब वे एक बार फिर पहल करेंगे.
इधर, लाश को वापस गांव लाने की परिवार वालो की जद्दोजहद अब तक विफल है. ना जानें कहां कागजी पेंच फंस गया है कि लाश बीते 43 दिनों बाद भी आने का कोई आसार नहीं दिख रहा. शंभू को सउदी भेजने वाली कंपनी का कहना है कि हमने सरकार के दूतावास में हर आवश्यक कागजात उपलब्ध करा दी है. हमारी जिम्मेदारी महज इतनी ही थी. इसके बाद तो अब सरकार की यह जिम्मेदारी है कि किस प्रकार वहां से शंभू के शव को भारत मंगाती है.
शंभू के परिजन बताते हैं कि शंभू एक साल पहले 19 जनवरी को सउदी कमाने के लिये गया था. बतौर जेनरल इलेक्ट्रिशयन के पद पर शंभू को काम दिलाने के लिये मुंबई की एक कंपनी इमरान इंटरनेशनल ने सउदी भेजा था. 29 दिसंबर को सउदी में सड़क दुर्घटना में शंभू की मौत हो गयी. गांव के अन्य तीन लोगों ने शंभू के शव की पहचान की थी. जिसके बाद शंभू के शव को सउदी पुलिस ने समताह जेनरल अस्पताल में रख दिया. गांव के लोगों ने शंभू के दुर्घटना में मौत हो जाने की जानकारी दिया तो परिवार के सपनों और अरमानों पर बज्रपात हो गया. बाप, मां, पत्नी, बेटा सगा संबंधी दहारें मार- मार कर रोने लगे. पर इनके रोने का सिलसिला मात्र एक दिन या कुछ दिन का नहीं रहा. यह तो मानों इस परिवार के लिये अब हर दिन के रूटिन में शामिल हो गया है.

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