नौकरी का झांसा दे बनाया बंधुआ

यातना . गुलामों सा करते थे व्यवहार, बेगलुरू से मुक्त मजदूर वापस लौटे घर मधुबनी/बेनीपट्टी : देश 68 वें गणतंत्र दिवस मनाने की दहलीज पर खड़ा है. पर आज भी अंग्रेजी हुकूमत की तरह ही हमारे देश के कुछ पूंजीपति गरीब मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे है. बेंगलुरू के नंदली से बेनीपट्टी के […]

यातना . गुलामों सा करते थे व्यवहार, बेगलुरू से मुक्त मजदूर वापस लौटे घर

मधुबनी/बेनीपट्टी : देश 68 वें गणतंत्र दिवस मनाने की दहलीज पर खड़ा है. पर आज भी अंग्रेजी हुकूमत की तरह ही हमारे देश के कुछ पूंजीपति गरीब मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार कर रहे है. बेंगलुरू के नंदली से बेनीपट्टी के तिसियाही के मुक्त हुए 15 बंधुआ मजदूरों की आपबीती तो कम से कम यही बयां कर रही है. सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं कि किस प्रकार इन लोगों के साथ जानवरो से भी बदतर सुलूक किया गया. बीते रविवार को मुक्त होकर जब ये अपने गांव आये तो लगा कि इन लोगों को नयी जिंदगी मिली है. गांव के सुरेंद्र सदा, रंजीत सदा, सिंकंदर सदा बताते हैं कि इन लोगो ने तो अपने गांव वापस आने की उम्मीद ही छोड़ दी थी.
पांच युवक अभी भी हैं कैद में : गांव के पांच युवक अभी भी कैद में हैं. रंजीत सदा व गांव आये अन्य मुक्त हुए मजदूरो ने बताया है कि जिस जगह पर ये लोग काम करते थे उस जगह से ही मौका मिलने पर झंझारपुर के अरूण सदा ने पुलिस को फोन कर अपनी स्थिति बतायी. जिस पर पुलिस ने रेड की और इनलोगों को मुक्त कराया. पर इस कैंप में गांव के पांच युवक नहीं थे. संभावना जतायी जा रही है कि इन लोगों को उसी मालिक के दूसरे कारखाने पर रखा गया है. ये मजदूर हैं विजय सदा, ललित सदा, फेकन सदा, छोटू सदा, इंद्र कुमार. इन लोगों के परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है.
प्रशासन व मिशन ने कराया मुक्त
बेंगलुरू में वर्षों से बंधुआ मजदूरी कर रहे जिले के 16 बंधुआ मजदूरों को बेंगलुरू प्रशासन व इंटरनेशल जस्टिस मिशन के सहयोग से मुक्त कराया गया. जिसके बाद सभी मजदूरों को श्रम विभाग को सौंप दिया गया. श्रम विभाग के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी अशोक कुमार के नेतृत्व में जुबैर आलम व सोहैल अहमद द्वारा सभी बंधुआ मजदूरों को उनके पैतृक स्थान पर उनके परिजनों के हवाले रविवार देर रात्रि को किया गया.

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