स्टेट बैंक को जुर्माना

मधुबनी : भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दस हजार रुपये निकासी का हिसाब नहीं देना व खाता के परिचालन पर रोक लगाना बैंक को महंगा पड़ा. इस बाबत उपभोक्ता न्यायालय में वाद संख्या 91/2013 मामले में सुनवाई करते हुए स्टेट बैंक मधुबनी को आवेदक संजय कुमार सिंह को 16 अगस्त 2009 से 16,133 रुपये पर आठ […]

मधुबनी : भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दस हजार रुपये निकासी का हिसाब नहीं देना व खाता के परिचालन पर रोक लगाना बैंक को महंगा पड़ा. इस बाबत उपभोक्ता न्यायालय में वाद संख्या 91/2013 मामले में सुनवाई करते हुए स्टेट बैंक मधुबनी को आवेदक संजय कुमार सिंह को 16 अगस्त 2009 से 16,133 रुपये पर आठ फीसदी ब्याज के दर देने का आदेश जारी किया है. वहीं वाद खर्च दो हजार एवं मानसिक क्षति के लिए भी दो हजार देने का आदेश जारी किया है.

साथ ही कहा है कि 90 दिनों के अंदर भुगतान नहीं करने पर उक्त बैंक से 10 प्रतिशत के ब्याज के साथ रकम वसूल की जायेगी. उक्त आदेश उपभोक्ता न्यायालय के अध्यक्ष विनोदानंद झा विनित सदस्य लक्ष्मण कुमार एवं रंजना झा का पीठ ने जारी किया. वहीं आवेदक की ओर से अधिवक्ता राम शरण व स्टेट बैंक की ओर से अधिवक्ता धनंजय झा ने बहस की.

क्या था मामला. उक्त वाद के सूचक संजय कुमार सिंह द्वारा भारतीय स्टेट बैंक में खाता खुलवाया था. 19 फरवरी 2010 को बिना सूचना को खाता के परिचालन पर बैंक ने रोक लगा दिया था. जानकारी के बाद सूचक द्वारा बैंक से खाता में सुधार की शिकायत करने के बाद भी खाता पर से रोक नहीं हटाया गया था. बैंक द्वारा सूचित किया गया कि खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण दस हजार रुपये की निकासी कर ली गई है. आवेदक द्वारा 14 मई 2009 को खाता से 25126 अलग-
अलग दस दस हजार रुपया दो बार निकासी कि गई थी. लेकिन बैंक द्वारा दस दस हजार की तीन बार निकासी की बात की गई थी. आवेदक द्वारा बैंक के पास सभी कागजात जमा करने के बाद भी मामला नहीं निबटा तो आवेदक संजय कुमार सिंह ने उपभोक्ता न्यायालय में आवेदन दाखिल किया था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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