मौसम. पछिया हवा से जनजीवन बेहाल, पाला गिरा, घरों में दुबके लोग
मधुबनी : बीते तीन दिन धूप निकलने से ठंड से मिली राहत एक बार फिर कंपकंपी में बदल गया है. बुधवार को अचानक तापमान में गिरावट हो गयी. सुबह में पाला भी गिरने की बात बतायी जा रही है. ऐसा लगा जैसे बारिश की बूंद गिड़ रही हो. तेज पछिया के कारण पारा लुढ़क गया. जिससे लोग घरों में ही दुबके रहे. दिनभर लोगों को सूर्यदेव का दर्शन नहीं हो सका. लोग देर तक अपने अपने घरों में कंबल व रजाई में ही दुबके रहे. ठंड से बचने के लिए कहीं हीटर तो कहीं अलाव जला कर लोग बैठे रहे. हालांकि अब तक प्रशासन ने कहीं भी अलाव का इंतजाम नहीं किया है.
फसल पर प्रभाव
ठंड से आलू, सरसों, मंसूर, अरहर सहित सब्जी के अन्य फसलों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है. तापमान में गिरावट होने से आलू , टमाटर में झुलसा का प्रकोप होने की संभावना बढ़ जाती है तो मंसूर में हरदा रोग एवं सरसों व अरहर में लाही का प्रकोप होने की संभावना रहती है. इससे निजात पाने के लिए किसानों को नियमित रूप से फसल की देख रेख करनी चाहिये व बीमारी से बचाव के लिए दवा का छिड़काव भी जरूर करना चाहिये. जिला कृषि परामर्शी रंधीर भारद्वाज बताते हैं कि आलू में वर्तमान समय में झुलसा से बचाव के लिये इंडोफिल एम 45 का प्रतिलीटर पानी में दो ग्राम मिला कर छिड़काव करने की सलाह दी है. वहीं मंसूर में उखड़ा रोग से बचाने के लिए कार्बेडाजीम एवं मिंकोजेब मिला कर प्रति लीटर ढाई ग्राम मिला कर छिड़काव करना चाहिये. मधवापुर : सड़कों पर इक्के दुक्के वाहन ही रेंगते नजर आ रहे थे. अन्य दिनों की अपेक्षा लोगों से गुलजार रहनेवाला मधवापुर, बिहारी, बासुकी, साहरघाट सहित अन्य कई स्थानों के चौक चौराहों की दुकानों पर उपभोक्ताओं की कमी ठंढ के प्रभाव का एहसास करा रही थी.
मधेपुर : मधेपुर सहित आसपास का क्षेत्र बुधवार को कडाके की ठंढ की चपेट में रहा. बाजार में सन्नाटा पसरा रहा पिछले सप्ताह ठंढ में कमी आने के बाद लोग राहत महसूस करने लगे थे. लेकिन एक बार फिर मौसम के करवट ने आम जनजीवन को प्रभावित कर दिया है.
घने कोहरे के बीच सड़क पर जाती गाड़ी .
प्रतिवर्ष की मौत के आंकड़ों से नहीं चेता प्रशासन, हर अंचल को मिले दो-दो हजार
जिले में ठंड से प्रतिवर्ष की मौत के आंकड़ों से भी प्रशासन की निद्रा खुलती नहीं दिखाई दे रही है. ठंड के निजात के लिए प्रशासन द्वारा की गयी तैयारी को देखकर तो यही कहा जा सकता है. इसे विवशता कहें या फिर उदासीनता. खैर उनकी तैयारियों पर गौर करें तो अलाव के लिए जिला पदाधिकारी द्वारा दिये गये 50 हजार रुपये अंचल में ही अब तक रह गये. कहीं भी अलाव का इंतजाम नहीं किया जा सका है. जिला पदाधिकारी ने आपदा विभाग से हर अंचल को दो-दो हजार रुपये आवंटित किये गये थे. जबकि रहिका अंचल के लिये दस हजार रुपये. कुल पचास हजार रुपये आवंटित किये गये थे. वहीं आपदा विभाग के प्रधान सचिव व्यास जी ने भी गरीब, नि:सहाय लोगों के बीच अलाव का वितरण करने एवं कंबल बांटने का निर्देश दिया था. लेकिन इनके आदेश पर अब तक अमल नहीं हो सका है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि तापमान जब सात डिग्री से नीचे आयेगी या सात डिग्री सेल्सियस पर होगी तभी यह सुविधा लोगों को मिल सकेगी.
