डाॅक्टर ना वार्ड, जले तो यहां नहीं हो सकेगा इलाज, हाल सदर अस्पताल का
मधुबनी : यदि जिले में कोई जल जाये तो उसका इलाज सदर अस्पताल में संभव ही नहीं है. प्राथमिक उपचार के बाद उसे तत्काल ही दरभंगा या निजी क्लिनिक में रेफर कर दिया जाता है. दरअसल सदर अस्पताल में बर्न वार्ड है ही नहीं. कुछ माह पहले तक यह भले ही कागज तक दिखता था. पर इन दिनों वह भी नहीं है. बर्न वार्ड को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर दिया गया पर उसे भी कर्मी के रहने का कमरा बना दिया गया है. पूर्व में बर्न वार्ड का भवन बनाया तो गया लेकिन उसे राष्ट्रीय मानक के अनुरूप मरीजों के इलाज के लिए उपलब्ध नहीं कराया गया. नतीजतन जिले में आगजनी के घटना में गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को या तो डीएमसीएच या पीएमसीएच रेफर किया जाता है. वहीं सामान्य रूप से जले महिला मरीज को महिला वार्ड में व पुरुष मरीज को पुरुष वार्ड में रखकर उपचार किया जाता है.
सदर अस्पताल परिसर में वर्षों पूर्व बर्न वार्ड का भवन का निर्माण स्वास्थ्य विभाग द्वारा किया गया. लेकिन उसे सुविधा से युक्त नहीं किया गया. पिछले दो माह पूर्व बर्न वार्ड को आइसोलेशन वार्ड के रूप में तब्दील किया गया. जहां डायरिया व हैजा व अन्य छुआ छूत बीमारी से ग्रसित मरीजों को उपचार उपलब्ध हो सके. लेकिन आइसोलेशन वार्ड भी मात्र नाम को है. इस वार्ड के एक कमरे में कपड़ा धोने वाले व दूसरे कमरे में पोस्टमार्टम कर्मी ने अपना आवास बना रखा हैं.
सैकड़ों आते जले मरीज
आकस्मिक सेवा से मिली जानकारी के अनुसार प्रति माह 10 से 15 जले हुए मरीज उपचार के लिए जिले के अन्य क्षेत्रों से आते हैं. जिनमें गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को डीएमसीएच या अन्य संस्थानों के लिए रेफर कर दिया जाता है. ऐसे में जले से प्रभावित लोगों का इलाज सदर अस्पताल में होना मुश्किल ही नहीं असंभव है.
नये सिरे से की
जाएगी पहल
बर्न वार्ड के लिए नये सिरे से पहल की जायेगी. विभाग के वरीय अधिकारी से दिशा निर्देश प्राप्त कर सदर अस्पताल में राष्ट्रीय मानक के अनुरूप बर्न वार्ड का निर्माण किया जायेगा. ताकि मरीजों को उपलब्ध सुविधा का लाभ मिल सके.
डाॅ. अमर नाथ झा, सिविल सर्जन
