पैसेंजर ट्रेन रोकी, सड़क जाम

भाकपा माले के बिहार बंद का जिले में दिखा आंशिक असर माले कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी मधुबनी : त सूत्री मांगों को लेकर भाकपा माले ने सोमवार को बिहार बंद किया. इसका मिलाजुला असर रहा. माले कार्यकर्ताओं ने मधुबनी स्टेशन पहुंच कर ट्रेन रोकी व सड़क को जाम कर दिया […]

भाकपा माले के बिहार बंद का जिले में दिखा आंशिक असर

माले कार्यकर्ताओं ने बिहार सरकार के खिलाफ जमकर की नारेबाजी
मधुबनी : त सूत्री मांगों को लेकर भाकपा माले ने सोमवार को बिहार बंद किया. इसका मिलाजुला असर रहा. माले कार्यकर्ताओं ने मधुबनी स्टेशन पहुंच कर ट्रेन रोकी व सड़क को जाम कर दिया . जिससे यातायात बाधित रहा. हालांकि बसों या अन्य वाहनों का परिचालन अन्य दिनों की भांति ही रहा. बाद में कार्यकर्ता समाहरणालय के समक्ष पहुंच कर सड़क जाम किया. बंद के दौरान माले कार्यकर्ता बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे थे.
सुबह से ही महिला पुरूष सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मधुबनी स्टेशन पर जमा हो गये थे. जैसे ही जयनगर से समस्तीपुर जाने वाली 55514 पैसेंजर ट्रेन रूकी. माले नेता ध्रुव नारायण कर्ण की अगुआई में कार्यकर्ता झंडा बैनर लेकर ट्रेन के इंजन पर चढ़ गये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. इस बंदी के कारण ट्रेन करीब 20 लेट से खुली. बाद में शांति पूर्वक माले कार्यकर्ता स्टेशन से बाहर निकल गये. हालांकि इससे किसी अन्य ट्रेन के परिचालन पर कोई असर नहीं पड़ा.
माले कार्यकर्ता ट्रेन रोकने के बाद मुख्य सड़क पर आये और स्टेशन के सामने मुख्य सड़क को जाम कर दिया. करीब आधे घंटे तक मधुबनी मुख्य सड़क मार्ग पर यातायात बाधित रहा. वहीं वाहनों की लंबी कतारें लग गयी. बाद में कार्यकर्ता शांतिपूर्वक नारेबाजी करते हुए समाहरणालय के सामने पहुंचे. यहां पर कार्यकर्ताओं ने सात सूत्री मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी किया व सड़क को करीब एक घंटे तक जाम कर दिया. जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
स्टेशन पर सभा का आयोजन: माले कार्यकर्ता वापस जुलूस निकालते हुए स्टेशन परिसर पहुंचे. यहां पर सभा आयोजित की गयी. सभा को संबोधित करते हुए माले नेता ध्रुव नारायण कर्ण ने कहा कि बिहार में टॉपर घोटाला से मेधावी छात्रों का भविष्य चौपट हो गया है. सरकार को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिये. पर सरकार दोषियों का बचा रही है. कहा कि इससे बिहार की पूरे देश में बदनामी हुई है. सात सूत्री मांगों में शिक्षा माफियाओं के संपत्ति को जब्त करने, वित्त रहित शिक्षा नीति को वापस लेने, वित्त रहित स्कूल कॉलेजों का सरकारीकरण करने,
शिक्षक कर्मचारियों सहित अन्य रिक्त पदों पर बहाली करने, मैट्रिक व इंटर बोर्ड की परीक्षा के पूरे रिजल्ट का पुनरीक्षण करने सहित अन्य मांग कर रहे थे. मौके पर उत्तीम पासवान, अरूण कामत, शांति सहनी, हरि कामत, राम नाथ साह, शिवनाथ साह, श्रीनाथ साह, सुमन साह, दिनेश पासवान, संजीव कामत, आमोद कर्ण सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे.

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